Noida Airport: जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर उस समय हड़कंप मच गया, जब पिछले दो-तीन दिनों से हवाई अड्डे की सीमा के भीतर संदिग्ध ड्रोन उड़ते देखे गए। एयरपोर्ट को केंद्र सरकार के नियमों के तहत 'नो-फ्लाई जोन' घोषित किया गया है, जहां बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना सख्त मना है। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आधी रात को उड़ते दिखे ड्रोन
एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारी कृष्ण कांत पांडे ने 15 फरवरी को जेवर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, ड्रोन कथित तौर पर झझर रोड के जरिए रनेरा-कुरैब गांव की तरफ से एयरपोर्ट परिसर में दाखिल हुए। ये ड्रोन देर रात करीब दो से तीन दिनों तक देखे गए, जो कुछ देर मंडराने के बाद उसी रास्ते से वापस लौट गए। सुरक्षा अधिकारी ने चेतावनी दी कि प्रतिबंधित क्षेत्र में इस तरह की गतिविधि हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जांच
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें सरकारी आदेशों की अवहेलना, मशीनरी के संचालन में लापरवाही और मानव जीवन की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसी धाराएं शामिल हैं। पुलिस अब इन ड्रोनों को ऑपरेट करने वालों की तलाश कर रही है।
NIA का ऑपरेशन या गांव की शादी?
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस मामले में एक नया मोड़ देते हुए बताया कि शुरुआती इनपुट से संकेत मिलते हैं कि यह एक 'गलतफहमी' भी हो सकती है। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए गए है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अपने किसी आधिकारिक काम के लिए इलाके में ड्रोन उड़ा रही थी। इसकी जानकारी एयरपोर्ट पर तैनात CISF को नहीं दी गई थी, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
हालांकि, अधिकारी ने यह भी बताया कि अक्सर एयरपोर्ट के पास बसे गांवों में शादियों या निजी कार्यक्रमों के दौरान लोग ड्रोन से वीडियोग्राफी करते है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि ये ड्रोन एयरपोर्ट की प्रतिबंधित सीमा के अंदर उड़ रहे है।
पुलिस के अनुसार, मामला 'पेचीदा' है क्योंकि यहां कई कारक एक साथ जुड़ रहे है। सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो, इसलिए सावधानी के तौर पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब यह सुनिश्चित कर रही है कि क्या ये ड्रोन वास्तव में स्थानीय लोगों द्वारा मनोरंजन के लिए उड़ाए गए थे या फिर किसी सुरक्षा एजेंसी के आधिकारिक ड्रिल का हिस्सा थे।