DU Results 2026: राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' और CJP कैंपेन का नहीं चला असर? जानिए DUSU चुनाव में ABVP के दबदबे का क्या है मतलब
DUSU Results 2026: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) में केंद्रीय पैनल के चार पद में से तीन पर जीत दर्ज की है। जबकि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) का टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की
DUSU Results 2026: इस बार NSUI अध्यक्ष पद समेत किसी भी केंद्रीय पद पर जीत दर्ज नहीं कर सकी
DUSU Results 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के चुनाव के नतीजों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है। ABVP के यश डबास ने अध्यक्ष पद पर NSUI के विजय शंकर मीणा को हराया। जबकि रिया छावड़ी ने सचिव और लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद जीता। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। इस बार कांग्रेस की छात्र संगठन NSUI अध्यक्ष पद समेत किसी भी केंद्रीय पद पर जीत दर्ज नहीं कर सकी।
साल 2015 के बाद यह पहली बार है जब NSUI दिल्ली यूनिवर्सिटी के चारों केंद्रीय पदों में से कोई भी पद नहीं जीत पाई। हालांकि, अध्यक्ष पद पर NSUI ने कड़ी चुनौती पेश की। वह ABVP से करीब 2 हजार वोट पीछे रही। इसलिए इसे केवल एकतरफा मुकाबला कहना सही नहीं होगा।
किसे कितने वोट मिले?
अध्यक्ष पद के चुनाव में 24,576 वोट हासिल करने वाले एबीवीपी के यश डबास ने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 2,053 मतों के अंतर से हराया। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। शौकीन को एनएसयूआई ने टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। सचिव पद के लिए चुनाव में एबीवीपी उम्मीदवार रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल किए।
जबकि एनएसयूआई उम्मीदवार नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए। जबकि समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार विशेष यादव को 15,778 वोट मिले। पिछले साल एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की थी। जबकि एनएसयूआई ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया था।
राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' और CJP प्रोटेस्ट का क्या हुआ?
कांग्रेस के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी की छात्र-केंद्रित पहलों 'छात्रों की गूंज' और हाल ही में स्टूडेंट के मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रोटेस्ट के बावजूद NSUI के कैंपेन को DUSU चुनाव में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। उपलब्ध चुनाव परिणाम यह दिखाते हैं कि व्यापक राजनीतिक या राष्ट्रीय स्तर की छात्र पहुंच को DUSU के केंद्रीय पदों पर जीत में तब्दील नहीं किया जा सका।
हालांकि, यह निष्कर्ष निकालना कि किसी एक अभियान की वजह से NSUI हारी या उसकी पूरी रणनीति विफल रही, उपलब्ध चुनाव परिणामों से सीधे साबित नहीं होता। चुनाव में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, कॉलेज स्तर का संगठन, स्थानीय मुद्दे और मतदान के दौरान जमीनी लामबंदी जैसे कई कारक प्रभाव डाल सकते हैं।
कैंपस के स्थानीय मुद्दे भी रहे अहम
इस चुनाव में छात्र राजनीति के कई स्थानीय मुद्दे चर्चा में रहे। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, छात्र सुरक्षा, हॉस्टल और कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा रहे। हाल की हॉस्टल बिल्डिंग दुर्घटना ने भी छात्रों की सुरक्षा और आवास से जुड़े सवालों को प्रमुखता दी। यही वजह है कि DUSU परिणामों को केवल राष्ट्रीय राजनीति के चश्मे से देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय शौकीन की बड़ी जीत भी बताती है कि संगठन से अलग उम्मीदवार-केंद्रित समर्थन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नतीजे क्या संकेत देते हैं?
DUSU के नतीजे फिलहाल इतना स्पष्ट करते हैं कि ABVP ने केंद्रीय पैनल में अपनी मजबूत मौजूदगी बरकरार रखी। जबकि NSUI चारों पदों पर जीत से दूर रही। दूसरी ओर, उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की जीत ने यह दिखाया कि बड़े छात्र संगठनों के बाहर से आने वाला उम्मीदवार भी पर्याप्त समर्थन जुटा सकता है। इसलिए इन नतीजों को राष्ट्रीय युवा अभियानों की सफलता या विफलता का अंतिम प्रमाण मानने के बजाय DUSU के स्थानीय चुनावी समीकरण, संगठनात्मक ताकत और छात्र मुद्दों के संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा।
'डूसू चुनाव परिणाम झूठ की राजनीति को खारिज किया'
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ऐतिहासिक जीत की सराहना करते हुए इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मुंह पर करारा तमाचा बताया। बीजेपी ने कहा कि उनकी झूठ की राजनीति पूरी तरह खारिज हो गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस जबरदस्त जीत ने उन राष्ट्र विरोधी ताकतों को स्पष्ट संदेश दिया है, जो युवाओं को अपने एजेंडे के लिए एक प्रयोगशाला में बदलना चाहते हैं। शाह ने इस शानदार जीत का स्वागत करते हुए कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि इस जीत से नयी ऊर्जा प्राप्त कर और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए परिषद के कार्यकर्ता छात्र हित और राष्ट्र निर्माण के कार्य को निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे।"
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने छात्र संगठन की जीत को युवाओं की राष्ट्र प्रथम नीति में अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। सिंह ने X पर कहा, "मुझे विश्वास है कि एबीवीपी छात्र हितों, राष्ट्र सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के लिए इसी समर्पण के साथ काम करती रहेगी।" केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू समेत BJP के कई नेताओं ने एबीवीपी की जीत का स्वागत किया और इसे कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ जनादेश बताया।
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि एबीवीपी की जीत सकारात्मक छात्र राजनीति में युवाओं के भरोसे को दर्शाती है। शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि डूसू चुनाव में एबीवीपी की जीत छात्रों के कल्याण और राष्ट्र निर्माण के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को छात्रों का समर्थन दर्शाती है।