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E-Cigarette Row: 'संसद में ई-सिगरेट पीने वालों पर होगी कार्रवाई'; स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों को दी चेतावनी

E-Cigarette Row: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अनुराग ठाकुर के दावों के बाद मामले में जांच शुरू की गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद परिसर में ई-सिगरेट पीने के हालिया आरोपों को लेकर सांसदों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोमवार (12 जनवरी) को कहा कि ई-सिगरेट के मामले में कार्रवाई की जाएगी

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jan 12, 2026 पर 4:09 PM
E-Cigarette Row: 'संसद में ई-सिगरेट पीने वालों पर होगी कार्रवाई'; स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों को दी चेतावनी
E-Cigarettes Row: भारत में 2019 में ई-सिगरेट पर बैन लगा दिया गया था

E-Cigarette Row: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद परिसर में ई-सिगरेट पीने के हालिया आरोपों को लेकर सांसदों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोमवार (12 जनवरी) को कहा, "ई-सिगरेट के मामले में कार्रवाई की जाएगी।" साथ ही स्पीकर ने कहा कि सांसदों को संसद के नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जांच चल रही हैमामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई हैबता दें कि बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर के दावों के बाद ये जांच शुरू की गई हैउन्होंने कुछ विपक्षी सांसदों पर संसद के अंदर ई-सिगरेट पीना का आरोप लगाया था।

खबरों के मुताबिक, शिकायत के बाद CCTV फुटेज की समीक्षा की जा रही है। इसमें शामिल सांसदों से पूछताछ की जाएगी। ओम बिरला ने लोकसभा की गरिमा और नियमों का सम्मान करने की जरूरत पर जोर दिया। बिरला ने संसदीय दिशानिर्देशों और राष्ट्रीय कानून दोनों का सख्ती से पालन करने की बात दोहराई। लोकसभा के अंदर ई-सिगरेट पीने के कथित मामले ने संसद में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए लोकसभा स्पीकर को औपचारिक शिकायत सौंपी हैशिकायत में आरोप लगाया गया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक सांसद ने सदन के अंदर खुलेआम ई-सिगरेट का उपयोग किया। यह न केवल संसदीय नियमों का उल्लंघन है। बल्कि कानूनन अपराध भी है।

अनुराग ठाकुर के शिकायती पत्र के मुताबिक, लोकसभा जैसी पवित्र संस्था को भारतीय लोकतंत्र का सैंक्टम सैंक्टोरम (सबसे पवित्र जगह) कहा जाता है। उसमें प्रतिबंधित पदार्थ का उपयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। यह कृत्य संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। साथ ही सदन की कार्यवाही की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।

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