बंगाल में ED का ताबड़तोड़ एक्शन, पूर्व DCP के 'व्हाइट हाउस' जैसे आलीशान घर को देखकर अफसर भी हैरान

ह नया बना शानदार घर करीब दो से तीन एकड़ जमीन में फैला हुआ है। बताया जा रहा है कि इसे तैयार करने में कई करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इस आलीशान संपत्ति के निर्माण में भारी मात्रा में काले धन का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि यह कोई सामान्य मकान नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा और भव्य एस्टेट है। इसकी भव्यता और खर्च को देखकर ईडी अधिकारियों का ध्यान इस तरफ गया और अब इसे लेकर गहराई से जांच की जा रही है

अपडेटेड May 22, 2026 पर 7:57 PM
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पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार 22 मई को बड़े पैमाने पर छापेमारी की है।

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार 22 मई को बड़े पैमाने पर छापेमारी की है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कोलकाता पुलिस के डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े मुर्शिदाबाद के एक बेहद आलीशान घर पर छापेमारी की। जांच से जुड़े अधिकारी इस बड़ी संपत्ति को अनौपचारिक तौर पर “मुर्शिदाबाद का व्हाइट हाउस” कहकर बुला रहे हैं।

तीन एकड़ में बना घर

एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, यह नया बना शानदार घर करीब दो से तीन एकड़ जमीन में फैला हुआ है। बताया जा रहा है कि इसे तैयार करने में कई करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इस आलीशान संपत्ति के निर्माण में भारी मात्रा में काले धन का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि यह कोई सामान्य मकान नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा और भव्य एस्टेट है। इसकी भव्यता और खर्च को देखकर ईडी अधिकारियों का ध्यान इस तरफ गया और अब इसे लेकर गहराई से जांच की जा रही है।


इमारत देखकर जांच अधिकारी भी हैरान

ये छापेमारी कथित वित्तीय गड़बड़ियों और पुलिस अधिकारी व उसके करीबी लोगों से जुड़ी संपत्तियों की जांच का हिस्सा है। एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता पुलिस अधिकारी से जुड़े इस निर्माणाधीन आलीशान घर की भव्यता और वहां मौजूद बड़ी संपत्ति को देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी फिलहाल तलाशी के दौरान मिले वित्तीय दस्तावेजों, जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य अहम कागजात की जांच कर रहे हैं। ईडी सूत्रों का कहना है कि “अभी मामला खत्म नहीं हुआ है”, यानी आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे और कार्रवाई हो सकती है।

कौन हैं शांतनु सिन्हा बिस्वास

शांतनु सिन्हा बिस्वास कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। उन्होंने स्पेशल ब्रांच में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) के पद पर काम किया था। इससे पहले वे कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं, जिनमें कालीघाट पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज (ओसी) का पद भी शामिल है। 14 मई 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 11 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके कुछ दिनों बाद, 21 मई 2026 को कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने उनकी सेवा समाप्त कर दी। फिलहाल शांतनु सिन्हा बिस्वास कई बहु-करोड़ रुपये के आपराधिक गिरोहों और कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में जांच के घेरे में हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उनका नाम कई गंभीर मामलों में सामने आया है, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

ED ने मामलों का कर रही जांच 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लगातार पाँच समन भेजे जाने के बावजूद शांतनु सिन्हा बिस्वास पूछताछ के लिए पेश नहीं हुआ और कथित तौर पर लापता हो गया। इसके बाद एजेंसी ने उसके बालीगंज स्थित घर पर छापा मारा। साथ ही, उसके देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए सभी हवाई अड्डों और सीमा चौकियों पर देशभर में ‘लुकआउट सर्कुलर’ जारी किया गया। जमीन कब्जाने वाले गिरोह के मामले के अलावा भी बिस्वास कई अन्य आरोपों को लेकर जांच के घेरे में है। उस पर आरोप है कि उसने अपने प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए स्थानीय पुलिस थानों में ‘ऑफिसर-इन-चार्ज’ जैसी अहम और फायदे वाली सरकारी पोस्टिंग में हस्तक्षेप किया। गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ कुछ और गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। जांच में यह दावा किया जा रहा है कि ‘पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड’ के फंड में बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं। बताया जा रहा है कि इस बोर्ड में बिस्वास की अहम भूमिका थी और वह वहां महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहा था।

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