भीषण और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जूझ रहे भारत के लिए राहत की सबसे बड़ी और पहली खबर सामने आ गई है। जहां एक तरफ देश का उत्तर, मध्य और पूर्वी हिस्सा प्रचंड लू की आग में तप रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम के मिजाज में एक बड़ा और सुखद बदलाव आना शुरू हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में मानसून के विशाल और घने बादलों का सिस्टम तेजी से भारत की मुख्य भूमि की ओर बढ़ रहा है। इस बीच, मायानगरी मुंबई के कई इलाकों में मानसून-पूर्व बारिश की पहली फुहारों ने दस्तक दे दी है, जिससे पिछले कई दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से लोगों को कुछ राहत मिली है।
मुंबई और पुणे में प्री-मानसून का अलर्ट, बदला मौसम का मिजाज
मुंबई के कई पूर्वी उपनगरों में प्री-मानसून बारिश का पहला दौर देखने को मिला है। मुलुंड और भांडुप जैसे इलाकों में अचानक घने काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ीं। इस अचानक हुई बारिश से शहर के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। यह बारिश मुंबई के अप्रत्याशित मानसून सीजन के आगमन का साफ संकेत दे रही है। मुंबई से लेकर पुणे और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों समेत गुजरात, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में आज से लेकर वीकेंड (सप्ताहांत) तक प्री-मानसून एक्टिविटी की गतिविधियां शुरू होने और भारी बारिश व गरज-चमक की आशंका जताई गई है।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे मानसून के घने बादल, भारत की ओर रेस
आईएमडी द्वारा शुक्रवार को जारी की गई INSAT-3DS थर्मल इंफ्रारेड सैटेलाइट इमेज में राहत की सबसे पहली और बड़ी तस्वीर दिखाई दी है। इस तस्वीर में बादलों की एक बेहद घनी पट्टी दक्षिणी अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और पूर्वी हिंद महासागर के हिस्सों में फैली हुई साफ नजर आ रही है। यह फॉर्मेशन इस बात का सबूत माना जा रहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) बहुत तेजी से फॉर्म हो। यह भारत में बारिश के पारंपरिक प्रवेश द्वार यानी केरल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक वायुमंडल में ऊंचे गरजने वाले बादल तेजी से उठ रहे हैं। ऐसे फॉर्मेशन को अक्सर व्यापक मानसूनी बारिश का अग्रदूत माना जाता है।
भीषण गर्मी ही खींच रही है मानसूनी हवाओं को अपनी ओर
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और विदर्भ के कुछ हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है, जबकि दर्जनों शहर दिनों से 42°C के ऊपर फंसे हुए हैं। उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने गंगा के मैदानों और मध्य भारत में गर्मी को और बढ़ा दिया था। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि मैदानी भूभाग पर होने वाली यही अत्यधिक हीटिंग (गर्मी) अब हिंद महासागर से नमी से लदी हवाओं को महाद्वीप की ओर खींचने में मदद कर रही है।
आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले तीन से चार दिनों के दौरान दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के कुछ और हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम एजेंसी ने संकेत दिया है कि मानसून 26 मई 2026 के आसपास केरल में दस्तक दे सकता है।
बंगाल की खाड़ी के मध्य से तमिलनाडु तक फैली एक ट्रफ़ लाइन के प्रभाव से वर्तमान में दक्षिण भारत में मौसमी गतिविधियां चल रही हैं। इसके प्रभाव से केरल में आमतौर पर बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना हैं। केरल में दस्तक देने के बाद, मानसूनी हवाओं और बारिश के धीरे-धीरे प्रायद्वीपीय भारत में उत्तर की ओर बढ़ने की उम्मीद है, जिसके बाद यह मध्य और उत्तरी क्षेत्रों की ओर बढ़ेगी। जहां एक तरफ देश के दक्षिणी और तटीय हिस्सों में मानसून और प्री-मानसून की बौछारें राहत दे रही हैं, वहीं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए राहत अभी भी थोड़ी दूर है। उत्तर भारत के राज्यों को मानसूनी राहत के लिए अभी कुछ और समय का इंतजार करना होगा।