Winzo ने 4 साल में किया ₹3522 करोड़ का हेरफेर! ED ने कसा शिकंजा, ये है मामला

ED in Action against Winzo: रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म विंजो के खिलाफ ईडी ने कड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने विंजो पर चार साल में ₹3522 करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगाया है तो साथ ही इस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप लगाया है। जानिए कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और विंजो ने क्या गड़बड़ी की है जिसके चलते यह ईडी के शिकंजे में फंसी है?

अपडेटेड Jan 26, 2026 पर 4:31 PM
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ED की जांच में सामने आया कि Winzo का बॉट-फ्री होने का दावा गलत है।

ED in Action against Winzo: केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी नेऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म विंजो, इसके डायरेक्टर्स और अन्य के खिलाफ बेंगलुरु की एक विशेष अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईडी का आरोप है कि चार साल से भी कम समय में ₹3,522 करोड़ की राशि की हेराफेरी की गई। यह शिकायत बेंगलुरु सीईएन पुलिस स्टेशन के साथ-साथ राजस्थान, नई दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस की दायर की हुई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के बाद दायर की गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने पिछले साल 1 8 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच विंजो के ऑफिस, उसके डायरेक्टर्स के घरों और अन्य स्थानों पर तलाशी ली और इस दौरान ₹690 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई।

क्या काम करती है Winzo?

विंजो अपने मोबाइल ऐप के जरिये रियल मनी गेमिंग (RMG) सेगमेंट में काम करती है और 100 से अधिक नंबर-आधारित गेम्स उपलब्ध कराती है। कंपनी के दावे के मुताबिक इसके लगभग 25 करोड़ यूजर्स हैं, जिनमें से अधिकतर टियर-3 और टियर-4 शहरों से हैं। इसकी कमाई यूजर्स की बेटिंग राशि पर कमीशन से होती है। विंजो का दावा है कि इसका प्लेटटफॉर्म पूरी तरह से बॉट्स से मुक्त, पारदर्शी और सुरक्षित है।


फिर कहां हुई गड़बड़ी?

ईडी की जांच में सामने आया कि विंजो का बॉट-फ्री होने का दावा गलत है। गेम कोडबेस, थर्ड-पार्टी डेवलपर एग्रीमेंट्स और इंटर्नल कम्युनिकेशंस से सामने आया कि दिसंबर 2023 तक गेम्स में बॉट्स, एआई और एल्गोरिद्मिक प्रोफाइल्स शामिल थे। जांच के मुताबिक मई 2024 से अगस्त 2025 के बीच कंपनी ने कथित तौर पर एक नया तरीका अपनाया, जिसमें निष्क्रिय या डॉर्मेंट खिलाड़ियों के पुराने गेम डेटा के जरिए बिना यूजर्स की जानकारी या सहमति के उन्हें असली खिलाड़ियों के खिलाफ उतारा गया। ईडी के मुताबिक इन एक्टिविटीज को छिपाने के लिए कंपनी ने बॉट्स और सिमुलेटेड खिलाड़ियों को अंदरूनी तौर पर EP (Engagement Play), PPP (Past Performance of Player) और Persona जैसे भ्रामक नाम दिए।

ईडी का आरोप है कि शुरुआत में यूजर्स को छोटे बोनस देकर लुभाया गया और आसान बॉट्स के खिलाफ जिताया गया। यहां तक कि भरोसा बनाने के लिए उन्हें छोटा अमाउंट निकालने भी दिया गया। हालांकि जैसे ही यूजर्स ने बड़े दांव के साथ खेलना शुरू किया, वैसे ही कंपनी ने “विनिंग/हार्ड बॉट्स” को लगाया, जिससे असली यूजर्स को भारी वित्तीय झटका लगा। ईडी की जांच के मुताबिक वास्तविक यूजर्स को ₹734 करोड़ का नुकसान बॉट प्रोफाइल्स के चलते हुआ। एक और अहम बात ये भी है कि हाई स्टेक्स पर जिन यूजर्स ने जीत हासिल की, उन्हें कई नियमों के जरिए पैसे निकालने से भी रोक लिया जाता था।।

एक और अहम बात ये भी ईडी की जांच में सामने आई कि रियल मनी गेमिंग पर केंद्र सरकार के प्रतिबंध के बावजूद विंजो ने यूजर्स के वैध तरीके से जीते हुए और खाते में जमा ₹47.66 करोड़ वापस नहीं किए। इन सबको देखकर ईडी ने अनुमान लगाया कि पिछले साल 22 अगस्त तक के आंकड़ों के हिसाब से कंपनी ने वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2026 तक के बीच कुल ₹3,522.05 करोड़ की आपराधिक आय जेनेरेट की।

ईडी का यह भी आरोप है कि आपराधिक तरीके से विंजो ने जो पैसे जुटाए, उसे अमेरिका और सिंगापुर में बनाई गई शेल कंपनियों के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग किया गया। करीब $5.5 करोड़ को ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (ODI) के नाम पर इन शेल कंपनियों के विदेशी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके अलावा बिना किसी वैध कारोबारी वजह के ₹230 करोड़ की राशि को “होल्डिंग कंपनी से कर्ज” दिखाकर एक अन्य आरोपी सहायक कंपनी में भेजा गया। ईडी के मुताबिक ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के जरिये ₹150 करोड़ और डायवर्ट करने की कोशिश भी की गई, लेकिन अनिवार्य ऑडिट और यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा नहीं होने के चलते यह कोशिश सफल नहीं हो सकी।

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