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GMT की जगह अब 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' से चलेगी दुनिया! समय गणना पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान

उज्जैन में आयोजित ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि समय की गणना के तरीके और नाम पर फिर से विचार किया जा सकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों और विचारकों से अपील की कि इस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। सम्मेलन में उन्होंने कहा कि, उज्जैन वह जगह है, जहां भूमध्य रेखा और कर्क रेखा मिलती हैं और प्राचीन समय में यहीं से दुनिया के समय की गणना की जाती थी

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Apr 05, 2026 पर 4:05 PM
GMT की जगह अब 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' से चलेगी दुनिया! समय गणना पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश के समय के बदलाव को लेकर एक नई जानकारी दी है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने समय के गणना को लेकर एक नई जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ग्रीनविच मीन टाइम (GTM) की जगह महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की स्थापना की जाए। केंद्रीय मंत्री ने एक वैज्ञानिक चर्चा का आह्वान किया कि क्या "महाकाल स्टैंडर्ड टाइम" को ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) के एक वैकल्पिक ढांचे के तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने इस विचार को भारत की सभ्यता और वैज्ञानिक विरासत के संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश का उज्जैन “समय की गणना का मूल केंद्र” माना जाता है। ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान उन्होंने यह बात कही।

‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ पर धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान

उज्जैन में आयोजित ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि समय की गणना के तरीके और नाम पर फिर से विचार किया जा सकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों और विचारकों से अपील की कि इस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। सम्मेलन में उन्होंने कहा कि, उज्जैन वह जगह है, जहां भूमध्य रेखा और कर्क रेखा मिलती हैं और प्राचीन समय में यहीं से दुनिया के समय की गणना की जाती थी। इसलिए अब तार्किक रूप से ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) की जगह महाकाल स्टैंडर्ड टाइम (MST) को स्थापित करने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के आधुनिक एआई (AI) टूल्स भी मानते हैं कि समय की गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र ही रहा है। अब जरूरत है कि भारत अपने वैज्ञानिक गौरव को फिर से दुनिया के सामने मजबूती से स्थापित करे।

नई सोच विकसित करना है लक्ष्य

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