'चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं हैं...': I.N.D.I.A. ब्लॉक का चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर पलटवार, मांगा हलफनामा

Election Commission Vs Rahul Gandhi: कांग्रेस ने सोमवार को चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार पर पलटवार करते हुआ कहा कि पहले चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दे कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी नहीं है। इसके बाद कांग्रेस भी हलफनामा देकर बताएगी कि इसमें गड़बड़ है

अपडेटेड Aug 18, 2025 पर 4:44 PM
Election Commission Vs Rahul Gandhi: विपक्षी पार्टियों ने कहा कि कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त की धमकियों से डरने वाली नहीं है

Election Commission Vs Rahul Gandhi: विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ब्लॉक ने सोमवार (18 अगस्त) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग पर पलटवार किया है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने ECI के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या बढ़ाने, महादेवपुरा में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और वीडियो डेटा हटाने पर निर्वाचन आयोग चुप रहा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहा है। वह अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग उन अधिकारियों के हाथों में है जो विपक्ष के किसी भी आरोप की जांच नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं हैं।

गौरव गोगोई ने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "कल अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों पर सवाल उठाए। जबकि उन्हें ये बताना चाहिए था कि वे SIR जल्दबाजी में क्यों कर रहे हैं। वे चुप थे कि लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बीच 70 लाख नए मतदाता कैसे जुड़े। यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग ऐसे अधिकारियों के अधीन है जो निष्पक्ष नहीं हैं।"

कांग्रेस सांसद ने कहा, "वोट देने का अधिकार संविधान के द्वारा दिया गया सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है। हमारा लोकतंत्र आम लोगों के 'वोट देने के अधिकार' पर ही निर्भर है। इस अधिकार का संरक्षण केंद्रीय चुनाव आयोग का है। लेकिन जब देश के राजनीतिक दल, चुनाव आयोग से महत्वपूर्ण सवाल पूछ रहे हैं, तो चुनाव आयोग जवाब नहीं दे पा रहा है। चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी से भागने की कोशिश कर रहा है।"


उन्होंने कहा, "हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयोग ने जितनी भी बातें रखी, कोर्ट ने उन सबको नकार दिया। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस वार्ता की। इस वार्ता में उन्हें चुनाव आयोग की कमजोरी बतानी थी और विपक्ष के जायज सवालों के जवाब देने थे। जवाब देने के विपरीत, चुनाव आयुक्त ने राजनीतिक दलों पर ही सवाल उठाए, उनके ऊपर आक्रमण किया।"

गोगोई ने कहा, "प्रेस वार्ता में चुनाव आयोग ने एक निष्पक्ष चुनाव करवाने की अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरीके से नकार दिया। ये साफ हो चुका है कि चुनाव आयोग कुछ ऐसे अधिकारियों के कब्जे में है, जो किसी एक पार्टी का पक्ष लेते हैं। चुनाव आयोग को लगता है कि वो बड़ी-बड़ी बातें करके राजनीतिक दलों को डरा देंगे। हम उनसे इतना ही कहना चाहते हैं कि अफसर आएंगे-जाएंगे, लेकिन सदन हमेशा रहेगा और उनकी कार्रवाई की गवाही देगा। हम उन पर नजर रखेंगे और आने वाले समय में उचित कदम ऊठाएंगे।"

वहीं, विपक्ष के प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने कहा, "सपा नेताओं ने 2022 में मतदाता सूची से 18,000 मतदाताओं के नाम हटाने का हलफनामा दिया, लेकिन निर्वाचन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की।" उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का यह दावा गलत है कि विपक्ष बिना तथ्यों के आरोप लगा रहा है और कोई हलफनामा नहीं दिया गया है।

इसके अलावा I.N.D.I.A. ब्लॉक के प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने कहा, "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'डुप्लिकेट ईपीआईसी वोटर कार्ड' का मुद्दा उठाया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।" उन्होंने कहा कि फर्जी वोटर लिस्ट के लिए पूर्व चुनाव आयुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही लोकसभा को तुरंत भंग किया जाना चाहिए।

इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता मनोज झा ने कहा, "संविधान सुरक्षा के लिए है, यह संवैधानिक नैतिकता के आपके उल्लंघन के लिए ढाल नहीं हो सकता।" उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी संसद में एसआईआर के क्रियान्वयन में जल्दबाजी पर चर्चा की अनुमति क्यों नहीं दे रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को कहा था कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपने दावे को लेकर हलफनामा दें या फिर माफी मांगें।

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विपक्ष ने इन सवालों का मांगा जवाब

- SIR की प्रक्रिया इतनी हड़बड़ी में क्यों लाई गई?

- जब चुनाव सिर्फ 3 महीने बाद है, ऐसे में बिना विपक्षी दलों से चर्चा किए SIR लाने का क्या कारण था?

- महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा के बीच बड़ी संख्या में वोटर कहां से आ गए?

- ये निर्णय क्यों लिया गया कि पोलिंग बूथ के CCTV फुटेज को 45 दिनों में डिलीट कर दिया जाएगा?

- महादेवापुरा में 1 लाख फर्जी वोटर कहां से आए?

- आखिर कैसे मशीन रीडेबल इलेक्टोरल वोट प्राइवेसी का उल्लंघन हैं?

- बिहार के 65 लाख मतदाताओं के नाम आखिर क्यों काटे गए, वे इसका कारण एक सर्चेबल फॉर्मेट में क्यों नहीं दे पाए?

- आखिर क्यों वे वोटर आईडी के लिए आधार के खिलाफ थे?

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