साल 2026 में इंडिया का ट्रेड आउटलुक मिलाजुला दिखता है। एक तरफ मार्केट डायवर्सिफिकेशन के शुरुआती संकेत दिखे हैं तो दूसरी तरफ एक्सपोर्ट ग्रोथ के मुकाबले इंपोर्ट ग्रोथ ज्यादा रहने की उम्मीद है। इसमें ग्लोबल चुनौतियों का हाथ होगा। 2025-26 में मर्चेंडाइज इंपोर्ट ग्रोथ के एक्सपोर्ट के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा रहने का अनुमान है। यह अनुमान सर्वे ऑफ प्रोफेशनल फोरकास्टर्स ऑन मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स पर आधारित है। आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में इसे रिलीज किया था।
अगले वित्त वर्ष एक्सपोर्ट थोड़ा बढ़ सकता है
इंपोर्ट और एक्सपोर्ट की ग्रोथ के बीच का फर्क 2026-27 में कम होने की संभावना है। अगले वित्त वर्ष में आउटबाउंड शिपमेंट की ग्रोथ 4.1 फीसदी रहने की उम्मीद है, जबकि इंपोर्ट की ग्रोथ 5.6 फीसदी रह सकती है। एक्सपोर्ट में मामूली इजाफा होने की उम्मीद है। इस वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर के दौरान इंडिया का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स 292 अरब डॉलर रह सकता है। यह एक साल पहले की समान अवधि के 284.6 अरब डॉलर से ज्यादा है। यह करीब 2.6 फीसदी की ग्रोथ है। सिर्फ नवंबर में 38.13 अरब डॉलर का इजाफा हुआ।
2026 ग्लोबल ट्रेड के लिए मुश्किल साल
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च एनिशिएटिव (GTRI) के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने भी 2026 को बीते कुछ सालों में ग्लोबल ट्रेड के लिए सबसे मुश्किल बताया है। इसकी वजह कमजोर बाहरी डिमांड, बढ़ता संरक्षणवाद और क्लाइमेंट से लिंक्ड नए ट्रेड बैरियर्स हैं। इन वजहों से मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स ज्यादातर फ्लैट रहने की उम्मीद है। हालांकि, सर्विसेज के एक्सपोर्ट्स से ओवरऑल ट्रेड को कुछ सपोर्ट मिल सकता है।
सर्विसेज के एक्सपोर्ट्स से मिल सकती है मदद
श्रीवास्तव ने कहा कि सर्विसेज एक्सपोर्ट्स से देश के एक्सटर्नल सेक्टर को मदद मिल सकती है। 2026 में रिसीट्स 400 अरब डॉलर पार कर जाने की उम्मीद है। इससे FY26 में ओवरऑल आउटबाउंड शिपमेंट बढ़कर 850 अरब डॉलर पहुंच सकता है। FY25 में यह 825 अरब डॉलर था। अगले साल इंडिया के एक्सपोर्ट्स की ग्रोथ पर अमेरिका और यूरोपीय संघ से ट्रेड संबंधों का बड़ा असर पड़ेगा। अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। इस साल मई और नवंबर के बीच अमेरिका को एक्सपोर्ट्स करीब 21 फीसदी घटा है। इसकी वजह अमेरिका का 50 फीसदी टैरिफ है।
स्टील एक्सपोर्ट्स पर सीबीएएम का असर
यूरोपीय यूनियन (EU) का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) 1 जनवरी, 2026 से लागू हो रहा है। इसका असर इंडिया के स्टील एक्सपोर्ट्स पर पड़ रहा है। कंप्लांस और रिपोर्टिंग रिक्वायरमेंट्स की वजह से इसमें करीब 24 फीसदी गिरावट आई है। सीबीएएम का पूरा असर इंपोर्ट प्राइसेज पर 2027 में देखने को मिलेगा। इंडिया की ट्रेड डील के लिए ईयू और अमेरिका से बातचीत चल रही है।