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'ताकतवर देश हर मामले में मर्जी नहीं थोप सकते...', विदेश मंत्री जयशंकर ने कही ये बात

विदेश एस जयशंकर ने कहा कि हाल के वर्षों में बड़ी वैश्विक ताकतों के साथ भारत के रिश्ते पहले से कहीं ज़्यादा जटिल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ तालमेल बनाना अब आसान नहीं रहा है, चीन को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है और यूक्रेन युद्ध के चलते रूस के साथ भरोसा बनाए रखना भी मुश्किल हुआ है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 20, 2025 पर 8:41 PM
'ताकतवर देश हर मामले में मर्जी नहीं थोप सकते...',  विदेश मंत्री जयशंकर ने कही ये बात
एस जयशंकर ने शनिवार को पुणे में कहा कि आज दुनिया भारत को पहले से ज्यादा पॉजिटिव नजरिए से देखती है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को पुणे में कहा कि आज दुनिया भारत को पहले से ज्यादा पॉजिटिव नजरिए से देखती हैउन्होंने कहा कि भारत की इमेज में आया यह बदलाव एक सच्चाई है, जिसे नकारा नहीं जा सकता विदेश मंत्री ने शनिवार को कहा कि बदलती वैश्विक राजनीति को देखते हुए भारत को एक साफ़ और स्पष्ट विदेश नीति के “गेम प्लान” के साथ आगे बढ़ना चाहिए। पुणे बुक फेस्टिवल के दौरान एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज की ग्लोबल पॉलिटिक्स तेज़ी से जटिल और अनिश्चित होती जा रही है, ऐसे में किसी तरह की उलझन या कन्फ्यूजन से बचना ज़रूरी है। उन्होंने ज़ोर दिया कि विदेश नीति में फैसले देश के हितों को ध्यान में रखकर साफ़ तौर पर लेने चाहिए, न कि हिचकिचाहट के साथ।

एस जयशंकर ने कही ये बात 

एस जयशंकर ने कहा कि विदेश नीति को लेकर साफ सोच और स्पष्टता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, “जब आप विदेश नीति पर काम करते हैं, तो आपके पास स्पष्टता होनी चाहिए, फैसले लेने होते हैं और एक ठोस गेम प्लान होना चाहिए।” उन्होंने यह भी जर दिया कि भारत को यह समझना चाहिए कि उसके हित में क्या है और उसी दिशा में लगातार आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी रणनीतिक सोच को अपनी सभ्यता और संस्कृति के नजरिए से पेश करना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल पश्चिमी अकादमिक विचारों पर भरोसा करना सही नहीं है, क्योंकि वे अक्सर भारत की राज्य संचालन की पुरानी और मजबूत परंपराओं पर सवाल उठाते हैं।

भारत बड़ा वैश्विक ताकत

विदेश एस जयशंकर ने कहा कि हाल के वर्षों में बड़ी वैश्विक ताकतों के साथ भारत के रिश्ते पहले से कहीं ज़्यादा जटिल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ तालमेल बनाना अब आसान नहीं रहा है, चीन को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है और यूक्रेन युद्ध के चलते रूस के साथ भरोसा बनाए रखना भी मुश्किल हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि यूरोप भारत का एक अहम साझेदार बना हुआ है, जिसके लिए नई दिल्ली को अब और ज़्यादा कूटनीतिक प्रयास करने की जरूरत है।

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