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फिर बदली टीम! बंगाल चुनाव से पहले BJP छोड़ TMC में वापस लौटे फुटबॉलर दीपेंदु बिस्वास

दीपेंदु बिस्वास 2016 से 2021 तक बशीरहाट साउथ से तृणमूल विधायक रहे थे। लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और BJP से जुड़ गए थे। हालांकि अब उन्होंने साफ कहा है कि वे भाजपा में सक्रिय रूप से शामिल नहीं थे। पार्टी में वापसी के बाद दीपेंदु ने कहा, "मैंने स्वाभिमान के कारण तृणमूल छोड़ा था। मैं भाजपा में सिर्फ एक दिन के लिए गया था

Suresh Kumarअपडेटेड Feb 22, 2026 पर 9:24 PM
फिर बदली टीम! बंगाल चुनाव से पहले BJP छोड़ TMC में वापस लौटे फुटबॉलर दीपेंदु बिस्वास
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में दलबदल का दौर तेज हो गया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में दलबदल का दौर तेज़ हो गया है। इसी बीच पूर्व फुटबॉलर और बशीरहाट दक्षिण के पूर्व विधायक दीपेंदु बिस्वास ने एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली है। रविवार (22 फरवरी) को उन्होंने बशीरहाट जिला तृणमूल कार्यालय में औपचारिक रूप से पार्टी जॉइन की।

दीपेंदु बिस्वास 2016 से 2021 तक बशीरहाट साउथ से तृणमूल विधायक रहे थे। लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और BJP से जुड़ गए थे। हालांकि अब उन्होंने साफ कहा है कि वे भाजपा में सक्रिय रूप से शामिल नहीं थे। पार्टी में वापसी के बाद दीपेंदु ने कहा, "मैंने स्वाभिमान के कारण तृणमूल छोड़ा था। मैं भाजपा में सिर्फ एक दिन के लिए गया था। मैंने भाजपा का कोई प्रचार या कार्यक्रम नहीं किया। मैं 2014 से तृणमूल के साथ था और आज भी वहीं हूं।"

वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या फुटबॉल की तरह राजनीति में भी 'टीम बदलना' उनके लिए आसान है, तो उन्होंने कहा कि, वह एक घमंड का फैसला था और अब वे पार्टी के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि टिकट को लेकर अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, मैं 100 प्रतिशत निभाऊंगा।"

दीपेंदु बिस्वास के साथ-साथ बशीरहाट इलाके के कई कांग्रेस, CPM और भाजपा कार्यकर्ता भी तृणमूल में शामिल हुए। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि चुनाव से पहले सत्ताधारी पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटी है। इस बीच, भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने इस वापसी पर तंज कसते हुए कहा, "जब वे गए थे तब भी कोई असर नहीं पड़ा, और अब लौटने से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वे बशीरहाट में खड़े हुए और एक बार MLA बन गए शायद, फुटबॉल प्लेयर के लिए फुटबॉल खेलना ही बेहतर होता, अब फुटबॉल शायद फायदेमंद न हो।"

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