Free Trade Agreement : यूरोपीय देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement) से भारत की इकोनॉमी को बड़ा बूस्ट मिलेगा। CNBC AWAAZ से हुई खास बातचीत में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा इससे भारत में 40 लाख करोड़ का निवेश होगा और 50 लाख नौकरियों के मौके पैदा होंगे। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि यूरोपीय देशों का भारत भरोसेमंद पार्टनर बना है। भारत में बना हुआ सामान दूसरे देशों में पहुंचाना ही हमारा मकसद है। देश में नौकरियों के मौके पैदा करना भी FTA का मकसद है।
उन्होंने आगे कहा कि FTA से 8.5 लाख करोड़ का सीधा विदेशी निवेश (FDI) भारत में आएगा। इसके जरिए भारत में 40 लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा। इससे देश में इंफ्रा, मैन्युफैक्चरिंग, इंश्योरेंस और फाइनेंस में निवेश बढ़ेगा। देश में 50 लाख लोगों को सीधे नौकरियां मिलेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि SEZ पॉलिसी में कुछ बदलाव पर सरकार अभी विचार कर रही है। भारत में विदेशी कंपनियां निवेश करना चाहती हैं। इसके लिए सरकार सही माहौल बनाने पर फोकस कर रही है।
UK के बाद 4 और यूरोपियन देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
बता दें कि इंग्लैंड के बाद अब भारत ने यूरोप के चार और देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किया है। यूरोप के जिन 4 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है उसमें स्विट्जरलैंड के साथ ही नॉर्वे, आइसलैंड और Liechtenstein शामिल हैं। इस चारों देशों के साथ हुए करार सितंबर से लागू होंगे। स्विट्जरलैंड के साथ हुए करार के लागू होने से स्विट्जरलैंड के करीब 94 फीसदी ज्यादा सामानों पर और इन 4 देंशों के मिला दिया जाए तो 85 फीसदी से ज्यादा सामानों पर भारत में कोई इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी।
इसका मतलब ये है कि अब आपको स्विस घड़ी और चॉकलेट जैसे सामान सस्ते में मिलेंगे। इस समय स्विस चॉकलेट पर भारत 30 फीसदी ड्यूटी लगाता है। इन करारों का सबसे बड़ा फायदा ये है कि भारत ते हाई एंड टेक्नोलॉजी वाले सेक्टरों में बड़ी मात्रा में निवेश आएगा। भारी मात्रा में देश में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा ये एक बड़ी बात है। विदेशी फॉर्मा कंपनियां भारत में बड़ी मात्रा में निवेश कर सकती हैं। इस एग्रीमेंट के जरिए आईटी सेक्टर में भी बड़ा निवेश आ सकता है।
इस करार की सबसे बड़ी बात ये है कि अगले पंद्रह साल में देश में इन चार देशों की कंपनियों की तरफ से 100 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है। ध्यान रखें कि ये FDI होगा, FII नहीं। इस करार में ये भी शर्त है कि अगर ये FDI नहीं आता तो ड्यूटी में मिलने वाली छूट रद्द कर दी जाएगी।