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फ्यूल, फूड और EMI का बोझ, 2026 की पहली तिमाही में पूरी तरह चरमरा गया है मिडिल क्लास का बजट!

Economy-Inflation: ईंधन, महंगाई और EMI के इस तिहरी मार ने भारतीय उपभोक्ताओं के व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है। लोग अब थोक में सामान खरीदने के बजाय छोटे पैकेट खरीद रहे हैं ताकि रोजमर्रा के कैश फ्लो को मैनेज किया जा सके

Abhishek Guptaअपडेटेड Mar 22, 2026 पर 11:25 AM
फ्यूल, फूड और EMI का बोझ, 2026 की पहली तिमाही में पूरी तरह चरमरा गया है मिडिल क्लास का बजट!
गेहूं, सरसों और मौसमी सब्जियों की कीमतों में 15 दिनों में करीब 12% का उछाल आया है

साल 2026 की पहली तिमाही खत्म होते-होते मिडिल क्लास के घर का बजट पूरी तरह चरमरा गया है। वैश्विक उथल-पुथल, देश के भीतर मौसम की मार और EMI के बोझ ने मिलकर एक ऐसा 'तिहरा दबाव' पैदा किया है, जिसने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने वाले परिवारों को डिफेंसिव स्थिति में ला खड़ा किया है। अब सवाल यह नहीं है कि बचत कितनी होगी, बल्कि यह है कि प्राथमिकता किसे दी जाए: गाड़ी की टंकी को, रसोई के राशन को या बैंक की EMI को?

1. होर्मुज का संकट से महंगा हुआ ईंधन

इस आर्थिक चिंता का सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध है। 'होर्मुज जलडमरूमध्य' की नाकाबंदी ने दुनिया की 20% तेल और गैस सप्लाई पर खतरा पैदा कर दिया है। मार्च 2026 में बड़े महानगरों में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें ₹120 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम पिछले 60 दिनों में ₹150 तक बढ़ गए है। ईंधन महंगा होने का सीधा असर दूध से लेकर ई-कॉमर्स की डिलीवरी तक पर पड़ा है, क्योंकि कंपनियों ने अब 'वॉर रिस्क' और 'लॉजिस्टिक सरचार्ज' वसूलना शुरू कर दिया है।

2. मौसम की मार से बेकाबू हुआ फूड इन्फ्लेशन

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