उत्तर प्रदेश की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति में एक और मील का पत्थर जुड़ने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे का काम अब अपने अंतिम चरण में है और अप्रैल के अंत तक उत्तर प्रदेश की जनता को देश का एक और सबसे लंबा एक्सप्रेसवे समर्पित कर दिया जाएगा। आपको बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से जोड़ने वाला 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अब फर्राटा भरने के लिए तैयार है। हमारे सहयोगी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्यसभा सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को इसका लोकार्पण कर सकते हैं।
न्यूज़ 18 से खास बातचीत में डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि मेरठ और वेस्ट यूपी को पीएम मोदी ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, रैपिड रेल (RRTS) और मेरठ मेट्रो जैसे कई गिफ्ट बिन मांगे दिए हैं। अब गंगा एक्सप्रेसवे के रूप में यूपी की जनता को सबसे बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अप्रैल के महीने में ही इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे की 3 सबसे बड़ी खासियतें
मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर डांडू तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा है। वर्तमान में मेरठ से प्रयागराज जाने में 12 से 14 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की अधिकतम गति सीमा के साथ यह सफर मात्र 6 घंटे में पूरा हो जाएगा।
इस एक्सप्रेसवे की एक बड़ी विशेषता शाहजहांपुर में बनी 3.5 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप (हवाई पट्टी) है। इसका उपयोग भारतीय वायुसेना के विमान आपातकालीन लैंडिंग और टेकऑफ के लिए कर सकेंगे। इसके अलावा इस एक्सप्रेसवे को लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए बिहार तक विस्तारित करने की योजना है। इससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के साथ इसकी कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
करीब 36,000 से 37,000 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एक्सप्रेसवे यूपी के 12 जिलों (मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज) से होकर गुजरेगा। यह न केवल यात्रा का समय घटाएगा बल्कि इससे पूरे इलाके के औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।