Goa Nightclub Fire Case: 'लूथरा ब्रदर्स' की दिल्ली वापसी की तैयारी तेज, आज रात बैंकॉक पहुंचेगी गोवा पुलिस की टीम

Goa Nightclub Fire Case: थाई अधिकारी, भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। गोवा पुलिस की एक टीम आज देर रात बैंकॉक पहुंचने वाली है। थाई अदालत द्वारा डिपोर्टेशन आदेश जारी होने के बाद डिपोर्टेशन आदेश जारी कर दिए जाएंगे

अपडेटेड Dec 15, 2025 पर 1:54 PM
भारतीय अधिकारियों ने थाई अधिकारियों को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए है

Goa Nightclub Fire Case: गोवा नाइट क्लब मामले में वांछित सौरभ और गौरव लूथरा को जल्द ही भारत डिपोर्ट किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, लूथरा बंधुओं को कल तक दिल्ली लाए जाने की संभावना है। थाईलैंड में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, जिसके बाद दोनों भाइयों को भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा।

डिपोर्टेशन की प्रक्रिया अंतिम चरण में

लूथरा बंधुओं को भारत डिपोर्ट किए जाने की प्रक्रिया में तेजी आई है। भारतीय अधिकारियों ने थाई अधिकारियों को सभी आवश्यक दस्तावेज, जिनमें आपातकालीन प्रमाण पत्र शामिल हैं, उपलब्ध करा दिए हैं। इससे पहले लूथरा बंधुओं के भारतीय पासपोर्ट रद्द कर दिए गए थे, जिसके बाद उनका कानूनी इमिग्रेशन दर्जा समाप्त हो गया था। इसी कारण उन्हें थाईलैंड में हिरासत में लिया गया। चूंकि थाई अधिकारी मूल देश द्वारा जारी वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना किसी विदेशी नागरिक को डिपोर्ट नहीं कर सकते, इसलिए आपातकालीन प्रमाण पत्र निर्णायक साबित हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, थाई इमिग्रेशन अधिकारी अब अदालत की कार्यवाही शुरू करने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जो डिपोर्टेशन से पहले अंतिम कानूनी कदम है।


गोवा पुलिस टीम बैंकॉक रवाना

भारतीय और थाई अधिकारियों के बीच समन्वय तेज हो गया है, जिससे सभी बाधाएं काफी हद तक दूर हो गई हैं। गोवा पुलिस की एक टीम आज देर रात बैंकॉक पहुंचने वाली है। थाई अदालत द्वारा डिपोर्टेशन आदेश जारी होने के बाद हिरासत से संबंधित औपचारिकताओं को सुविधाजनक बनाने में इस टीम की उपस्थिति महत्वपूर्ण होगी।

वकीलों ने की मुलाकात, स्वास्थ्य की जानकारी ली

लूथरा बंधुओं की ओर से कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए वकीलों की एक टीम पहले ही बैंकॉक पहुंच चुकी है। कानूनी टीम के दो सदस्यों को भाइयों से मिलने की अनुमति दी गई। बैंकॉक अधिकारियों की सुविधा से यह मुलाकात लगभग 30 मिनट तक चली। कानूनी प्रतिनिधियों ने हिरासत में दोनों भाइयों की चिकित्सा स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की। वकीलों ने उन्हें डिपोर्टेशन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया और अदालत की मंजूरी मिलने के बाद अपनाए जाने वाले आगामी कदमों के बारे में मार्गदर्शन दिया।

फिलहाल, थाई अधिकारी भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, और उम्मीद है कि जल्द ही स्थानीय अदालत में मामला रखा जाएगा। अदालत की औपचारिकताएं पूरी होते ही डिपोर्टेशन आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

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