Shashi Tharoor: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' किए जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान सिर्फ नाम बदलने पर है, परियोजनाओं पर नहीं। थरूर ने यह भी बताया कि मलयालम में केरल का अनुवाद पहले से ही 'केरलम' होता है, जिससे राज्य का नाम बदलने की आवश्यकता पर सवाल उठते हैं।
थरूर ने कहा, "मलयालम में तो यह पहले से ही 'केरलम' है। अब एक मलयालम शब्द अंग्रेजी में आ रहा है। मुझे नहीं पता इससे क्या फर्क पड़ता है। सरकार ने हमें न तो एम्स दिया है और न ही कोई नया संस्थान। केंद्रीय बजट में भी कोई परियोजना नहीं है। लेकिन जब नाम बदलने की बात आती है, तो वे इसे मंजूरी देने को तैयार हैं।"
थरूर ने X पर एक अलग पोस्ट में एक "छोटा सा भाषा से जुड़ा सवाल” पूछा- नए "केरलम" के "निवासियों" के लिए इस्तेमाल होने वाले "केरलाइट" और "केरलन" शब्दों का क्या होगा? उन्होंने जोर देकर कहा कि 'केरलमाइट' किसी सूक्ष्मजीव जैसा लगता है और 'केरलमियन' किसी दुर्लभ खनिज जैसा।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को राज्य विधानसभा चुनावों से पहले केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केरल में मई से पहले चुनाव होने की उम्मीद है, जिसमें राज्य विधानसभा के 140 सदस्यों का चुनाव होगा। भारत निर्वाचन आयोग ने अभी तक चुनाव की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।
राज्य विधानसभा ने आधिकारिक अभिलेखों में नाम बदलने का प्रस्ताव पहले ही पारित कर दिया है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 2024 में यह प्रस्ताव पेश किया था और केंद्र सरकार से संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में दक्षिणी राज्य केरल का नाम "केरल" से बदलकर "केरलम" करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि मलयालम भाषी समुदायों के लिए एक एकीकृत केरल की मांग राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही उठ रही है।