उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में गुरुवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। यहां एक निर्माणाधीन पुल अचानक तेज आंधी-बारिश के दौरान ढह गया, जिसमें कम से कम 6 मजदूरों की मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि मरने वालों की संख्या बढ़कर 8 तक पहुंच सकती है। यह पुल मोराकंदर से कंदौर गांव को जोड़ने के लिए बेतवा नदी पर बनाया जा रहा था। हादसा रात करीब 2 बजे हुआ, जब पुल पर काम चल रहा था।
बताया जा रहा है कि बारिश के दौरान कुछ मजदूर हाइड्रा मशीन के नीचे खड़े थे। तभी अचानक पुल का हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा और मजदूर उसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया और मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश जारी है। प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं।
'हम पुल पर लेट, लेकिन तभीय...'
हादसे के वक्त इसी पुल पर काम कर रहे एक मजदूर ने बताया कि ये हादसा ऐसे समय हुआ, जब मजदूरों की शिफ्ट बदलने वाली थी। ऐसे में दोनों शिफ्ट के लोग इस पुल की चपेट में आ गए।
प्रत्यक्षदर्शी सुरेश कुमार ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया, "पुल पर दो शिफ्ट में काम होता है। हादसे के वक्त पहली शिफ्ट के लोग पुल के नीचे उतर आए थे, जबकि दूसरी शिफ्ट के 7 मजदूर पुल के ऊपर काम कर रहे थे। उनमें एक मैं भी था। जैसे ही तेज आंधी चली और तूफान आया हम खुद को बचाने के लिए पुल पर लेट गए, लेकिन तभी पुल भरभराकर नीचे गिर गया।"
बताया ये भी जा रहा है कि हादसे के वक्त 20 से 25 मजदूर पुल के ऊपर काम कर रहे थे, जबकि कुछ मजदूर नीचे सो रहे थे। इसी दौरान आंधी-तूफान आया और स्लैब गिर गया। नीचे सो रहे मजदूर उसमें दब गए।
'तेज गर्मी की वजह से रात में चल रहा था काम'
"सभाजीत करीब सात-आठ दिन पहले ही काम के लिए हमीरपुर गया था," यह कहते हुए मृतक के चाचा राम बाबू ने बताया कि वह पहले भी वहां जा चुका था। इन दिनों पड़ रही भारी गर्मी के कारण दिन में काम करना मुमकिन नहीं था, इसलिए ठेकेदार रात में ओवरटाइम कराकर काम खींच रहा था।
मजदूर रात के सन्नाटे में काम कर रहे थे कि तभी अचानक एक तेज तूफान ने दस्तक दी। तूफान के कारण निर्माणाधीन ढांचा ताश के पत्तों की तरह गिर गया और कई मजदूर मलबे में समा गए। राम बाबू ने बताया कि उनके गांव के तीन लोग वहां थे। खुशकिस्मती से एक शख्स बच गया और उसी ने फोन पर यह खौफनाक खबर दी कि सभाजीत मलबे के नीचे दब चुका है।