हंता वायरस से मौत वाले लग्जरी क्रूज शिप पर फंसे 2 भारतीय भी! कहां गए दोनों, अब ये बन गया सबसे बड़ा रहस्य

MV Hondius 2 Indian Crew: इस क्रूज पर सवार अब तक एक डच दंपत्ति और एक जर्मन यात्री की मौत हो चुकी है। डॉक्टरों का मानना है कि यह संक्रमण 'एंडिस वायरस' स्ट्रेन के कारण है। 2 मई को जब कई यात्रियों को सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी, तब जाकर WHO और अन्य एजेंसियों को इस आउटब्रेक की जानकारी दी गई

अपडेटेड May 08, 2026 पर 1:04 PM
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अटलांटिक महासागर में केप वर्डे के पास खड़े इस जहाज पर अब तक 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है

Hantavirus Outbreak: दुनियाभर में दहशत फैलाने वाले हंता वायरस (Hantavirus) का एपीसेंटर डच क्रूज शिप MV Hondius से एक बड़ी डराने वाली खबर सामने आ रही है। इस जहाज पर सवार 149 लोगों में 2 भारतीय क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। अटलांटिक महासागर में केप वर्डे के पास खड़े इस जहाज पर अब तक 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद WHO सहित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

क्रूज पर सवार थे 2 भारतीय

रिपोर्ट के अनुसार, जहाज को ऑपरेट करने वाली कंपनी 'ओशनवाइड एक्सपीडिशन' ने यात्रियों और चालक दल की राष्ट्रीयता की सूची जारी की है। इस लिस्ट में 2 भारतीयों के होने की पुष्टि की गई है, लेकिन कंपनी ने उनकी पहचान, पद या वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के बारे में कोई जानकारी शेयर नहीं की है। जहाज पर ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और स्पेन सहित 23 अलग-अलग देशों के लोग सवार हैं।


कैप्टन बोले- 'सब ठीक है' लेकिन फिर भी बिछ गईं लाशें

इस क्रूज पर सवार अब तक एक डच दंपत्ति और एक जर्मन यात्री की मौत हो चुकी है। डॉक्टरों का मानना है कि यह संक्रमण 'एंडिस वायरस' (Andes virus) स्ट्रेन के कारण है। 2 मई को जब कई यात्रियों को सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी, तब जाकर WHO और अन्य एजेंसियों को इस आउटब्रेक की जानकारी दी गई।

जहाज पर मौजूद यात्रियों ने डरावने अनुभव साझा किए हैं। जब पहली मौत हुई, तो कैप्टन ने वीडियो संदेश में कहा था कि मौत 'प्राकृतिक कारणों' से हुई है और जहाज पूरी तरह सुरक्षित है। वैसे 3 लोगों की मौत के बाद भी जहाज पर जिंदगी सामान्य रही। लोग बुफे टेबल पर साथ खाना खाते रहे और घुलते-मिलते रहे।

इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है ये वायरस

हंता वायरस के सामान्य स्ट्रेन केवल चूहों से इंसानों में फैलते हैं, लेकिन एंडिस वायरस का यह दुर्लभ स्ट्रेन इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस वायरस के लक्षण दिखने में 6 हफ्ते तक का समय लग सकता है, जिससे आने वाले दिनों में और मामले बढ़ने का खतरा है।

कैसे शुरू हुआ संक्रमण?

जांचकर्ताओं का मानना है कि वायरस जहाज पर नहीं, बल्कि यात्रा शुरू होने से पहले ही फैल चुका था। शक है कि अर्जेंटीना और चिली की यात्रा के दौरान कुछ यात्री संक्रमित चूहों या उनके मल-मूत्र के संपर्क में आए थे। यह क्रूज अर्जेंटीना से रवाना होकर कैनरी आइलैंड्स की ओर जा रहा था, लेकिन अब इसे समुद्र के बीच में ही रोक दिया गया है।

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