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Haridwar: हरिद्वार में हर-की-पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के लगे बोर्ड, सरकार भी कर रही है विचार; विपक्ष ने बताया संविधान का उल्लंघन

Har-ki-Pauri: घाटों का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा का कहना है कि घाटों की धार्मिक शुचिता और गरिमा बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंध आवश्यक है। उन्होंने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि हर-की-पौड़ी पर ड्यूटी के लिए गैर-हिंदू पुलिस कर्मियों या अधिकारियों को तैनात न किया जाए

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jan 17, 2026 पर 11:08 AM
Haridwar: हरिद्वार में हर-की-पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के लगे बोर्ड, सरकार भी कर रही है विचार; विपक्ष ने बताया संविधान का उल्लंघन
समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने इसे असंवैधानिक और समाज में नफरत फैलाने वाला कदम बताया

Har ki Pauri: उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित पवित्र हर-की-पौड़ी क्षेत्र में शुक्रवार को कई जगहों पर ऐसे होर्डिंग्स और पोस्टर लगाए गए है जिन पर लिखा है कि, 'गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है'। यह कदम 'गंगा सभा' द्वारा उठाया गया है, जो ब्रह्मकुंड और आसपास के घाटों की प्रबंधन करती है। घाटों को लेकर यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब राज्य सरकार पहले से ही इस क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर विचार कर रही है।

गंगा सभा ने 1916 के नियमों का दिया हवाला

गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और सचिव उज्ज्वल पंडित ने इस कदम का बचाव करते हुए कई बातें कही हैं। उन्होंने 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के मार्गदर्शन में बने हरिद्वार नगर पालिका के उपनियमों का हवाला दिया। उनके अनुसार, इन प्रावधानों में हर-की-पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश, निवास और व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध की बात कही गई है। गंगा सभा का कहना है कि घाटों की धार्मिक शुचिता और गरिमा बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंध आवश्यक है। उन्होंने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि हर-की-पौड़ी पर ड्यूटी के लिए गैर-हिंदू पुलिस कर्मियों या अधिकारियों को तैनात न किया जाए।

राज्य सरकार और राजनीतिक दलों का रुख

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