पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासत तेज़ होती जा रही है। हाल ही में राज्य बजट में लक्ष्मी भंडार योजना की राशि बढ़ाए जाने के बाद लाभार्थियों के खातों में पैसे पहुंचने लगे हैं। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे चुनाव से पहले बड़ा वोट हथियार बना रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भत्ता बढ़ोतरी को प्रचार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। इसी बीच दक्षिण 24 परगना के भांगर इलाके से पार्टी नेता शौकत मोल्ला का एक बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
रविवार (8 फरवरी) को भांगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शौकत मोल्ला ने खुले मंच से चेतावनी दी कि अगर किसी इलाके से TMC हारती है, तो वहां सरकारी योजनाओं का पैसा बंद हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि जिन तीन इलाकों में वे चुनाव हार चुके हैं, वहां पहले ही सरकारी आवास योजना की राशि रोक दी गई है।
सभा को संबंधित करते हुए उन्होंने कहा, "भांगर के जिन तीन इलाकों में मैं हारा हूं, वहां घर बनाने का पैसा बंद कर दिया गया है। अगर हिम्मत है तो वह पैसा निकालकर दिखाइए।" इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में उनके क्षेत्र में विरोधी दलों से जुड़े लोगों को सरकारी लाभ नहीं मिलने दिया जाएगा। शौकत मोल्ला ने दावा किया कि कृषक बंधु और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं का पैसा केंद्र सरकार या किसी अन्य पार्टी की ओर से नहीं, बल्कि ममता बनर्जी राज्य के राजस्व से गरीबों को दे रही हैं।
उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि तृणमूल चुनाव से पहले सरकारी योजनाओं को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है और लोगों को डराकर वोट लेने की कोशिश हो रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं पहले से ही ग्रामीण और शहरी गरीब महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। ऐसे में बजट बढ़ोतरी और खुले मंच से दी गई चेतावनियां साफ इशारा करती हैं कि सत्ताधारी दल 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा अब बड़ा चुनावी हथियार बनता दिख रहा है, जहां एक ओर सरकार इसे जनकल्याण बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे 'वोट के बदले लाभ' की राजनीति करार दे रहा है।