बिना UPSC के बना IAS! अनाथ आश्रम में रहा, डिलीवरी बॉय का काम किया, कैसे एक लड़का बना बड़ा अधिकारी? जानें संघर्ष की पूरी कहानी

नासर का जीवन बड़ी कठिनाइयों से शुरू हुआ। जब वह सिर्फ पांच साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। उनकी मां घर चलाने के लिए घरों में साफ-सफाई का काम करती थीं, लेकिन यह काफी नहीं था। उन्हें और उनके भाई-बहनों को 13 साल तक केरल के एक अनाथालय में रहना पड़ा

अपडेटेड Aug 22, 2025 पर 1:51 PM
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बिना UPSC के बना IAS! अनाथ आश्रम में रहा, डिलीवरी बॉय का काम किया, कैसे एक लड़का बना बड़ा अधिकारी?

हम सब ये बहुत अच्छे से ये जानते हैं कि IAS अफसर बनने का सपना आसान नहीं होता। इसके लिए आपको बेहद कठिन UPSC परीक्षा पास करनी पड़ती है। यह रास्ता लंबा है, जहां महंगी कोचिंग क्लासें, अनगिनत किताबें और सालों की मेहनत के साथ-साथ तनाव और संघर्ष भी साथी बन जाते हैं। लेकिन इसी कठिनाई में वो जज्बा छिपा होता है, जो सपनों को हकीकत बनाता है। लेकिन बी. अब्दुल नासर की कहानी हमें एक अलग रास्ता दिखाती है, एक ऐसा रास्ता जो और भी भी मुश्किल और भी दर्द भरा था। उनका सफर हमें प्रेरित करता है। उनका संघर्ष हमें सिखाता है कि सपनों तक पहुंचने का रास्ता हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता।

नासर का जीवन बड़ी कठिनाइयों से शुरू हुआ। जब वह सिर्फ पांच साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। उनकी मां घर चलाने के लिए घरों में साफ-सफाई का काम करती थीं, लेकिन यह काफी नहीं था। उन्हें और उनके भाई-बहनों को 13 साल तक केरल के एक अनाथालय में रहना पड़ा।

उनका बचपन खेल-कूद में नहीं, बल्कि काम में बीता। 10 साल की उम्र तक, वह अपने परिवार का पेट पालने और गुजारा चलाने के लिए सफाईकर्मी और डिलीवरी बॉय की नौकरी करते रहे।


हालांकि, इस दौरान भी पढ़ाई करते रहे, लेकिन साथ ही काम भी करते रहे, जैसे अखबार बांटना, दूसरे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना और फोन ऑपरेटर। वे ये सब काम अपने बाकी खर्चे पूरा करने के लिए करते थे।

आखिरकार एक दिन उन्हें राज्य के स्वास्थ्य विभाग में क्लर्क की नौकरी मिल गई। ज्यादातर लोगों के लिए ऐसी स्थिर सरकारी नौकरी ही काफी होती है। लेकिन नासर के लिए तो यह बस एक शुरुआत थी।

उनके पास UPSC परीक्षा की तैयारी के लिए न तो समय था और न ही पैसा। इसलिए, उन्होंने एक अलग रास्ता चुना, उन्होंने अपनी ही नौकरी में सबसे बेस्ट बनने का फैसला किया। वह साल-दर-साल कड़ी मेहनत करते रहे और लोगों ने भी उनकी तरफ ध्यान दिया। वह अपने काम में इतने अच्छे हो गए उन्हें लगातार तरक्की मिलती रही।

20 सालों से ज्यादा की समर्पित सेवा के बाद, वे राज्य सरकार में हायर पोस्ट पर पहुंच गए। उनके शानदार प्रदर्शन के कारण, आखिरकार 2017 में उन्हें IAS की पोस्ट पर प्रमोट किया गया।

वह आखिरकार अपनी मंजिल तक पहुंच गए। परीक्षा देकर नहीं, बल्कि जीतोड़ मेहनत और अपने काम की बदौलत।

उनकी कहानी अद्भुत है, लेकिन यह आपको सोचने पर मजबूर भी करती है। यह दर्शाती है कि प्रतिभा तो हर जगह है, लेकिन अवसर नहीं। नासर के इस सफर में दशकों का धैर्य लगा और यह उनके संघर्ष भरे बचपन के बाद ही संभव हो पाया।

यह कहानी उन कई प्रतिभाशाली लोगों की याद दिलाती है, जिन्हें अपने सपनों को पूरा करने का कभी सही मौका नहीं मिलता। उनकी सफलता एक जीत है, लेकिन इसक लिए उन्हें जो लंबा और मुश्किल सफर तय करना पड़ा, वो भी अपने आप में एक शांत देती है।

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