IDFC FIRST Bank में 590 करोड़ का महाघोटाला! चंडीगढ़ ब्रांच में सरकारी खातों में सेंध, 4 कर्मचारी सस्पेंड

IDFC First Bank Fraud: प्रारंभिक रिपोर्ट बताती है कि बैंक के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ मिलकर हरियाणा सरकार के फंड में हेराफेरी की। हालांकि बैंक का कहना है कि यह एक विशेष घटना है और इसका असर बैंक के अन्य सामान्य कामकाज या ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा

अपडेटेड Feb 22, 2026 पर 9:43 AM
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धोखाधड़ी में शामिल होने के संदेह में चार बैंक अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है

IDFC FIRST Bank ने SEBI को जानकारी दी है कि उसकी चंडीगढ़ स्थित शाखा में लगभग ₹590 करोड़ की बड़ी धोखाधड़ी हुई है। यह फ्रॉड मुख्य रूप से हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से जुड़ा है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह गड़बड़ी केवल कुछ चुनिंदा सरकारी खातों तक ही सीमित है और सामान्य ग्राहकों के पैसे पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस खुलासे के बाद बैंकिंग और सरकारी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

कैसे पकड़ी गई इतनी बड़ी धोखाधड़ी?

धोखाधड़ी का खुलासा 18 फरवरी 2026 को तब हुआ, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने और पैसा दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। जब बैंक ने कागजों की जांच की, तो विभाग द्वारा बताए गए बैलेंस और बैंक के सिस्टम में मौजूद वास्तविक बैलेंस में भारी अंतर पाया गया। इसके बाद जब अन्य सरकारी विभागों के खातों की जांच की गई, तो वहां भी करोड़ों रुपये गायब मिले। अब तक की जांच में यह राशि ₹590 करोड़ तक पहुंच गई है।


प्रारंभिक रिपोर्ट बताती है कि बैंक के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ मिलकर हरियाणा सरकार के फंड में हेराफेरी की। हालांकि बैंक का कहना है कि यह एक विशेष घटना है और इसका असर बैंक के अन्य सामान्य कामकाज या ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।

बैंक ने 4 कर्मचारियों को किया सस्पेंड

मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने तुरंत कड़े कदम उठाए है। धोखाधड़ी में शामिल होने के संदेह में चार बैंक अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है। बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और अपराधियों के खिलाफ आपराधिक और सिविल मुकदमा चलाने की तैयारी कर रहा है। जिन संदिग्ध खातों में पैसा भेजा गया था, उन्हें फ्रीज करने के लिए संबंधित बैंकों को रिक्वेस्ट भेज दी गई है। मामले की तह तक जाने के लिए बैंक एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट भी करवा रहा है।

इस घोटाले के खुलासे के बाद 20 और 21 फरवरी को बैंक की बोर्ड मीटिंग और ऑडिट कमेटी की आपात बैठकें हुईं। बैंक ने भरोसा दिलाया है कि वे जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं। बैंक नुकसान की भरपाई के लिए अन्य शामिल संस्थाओं की देनदारी और कानूनी रिकवरी प्रक्रिया पर काम कर रहा है।

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