TCS Nashik Case: 'अगर बच्चा चाहिए तो अपनी पत्नी को...', TCS केस में कर्मचारी का चौंकाने वाला बयान

TCS Nashik Case: महाराष्ट्र के TCS नासिक ब्रांच में महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले के बीच, अब एक पुरुष कर्मचारी ने भी चौंकाने वाला दावा किया है। उसने कहा कि उसे टोपी पहनने और नमाज अदा करने के लिए मजबूर किया गया था।

अपडेटेड Apr 16, 2026 पर 10:35 AM
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TCS विवाद गहराया, महिला के बाद पुरुष कर्मचारी ने भी लगाए गंभीर आरोप

TCS Nashik Case: महाराष्ट्र के TCS नासिक ब्रांच में महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले के बीच, अब एक पुरुष कर्मचारी ने भी चौंकाने वाला दावा किया है। उसने कहा कि उसे टोपी पहनने और नमाज अदा करने के लिए मजबूर किया गया था। उसने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों में से एक ने उससे कहा कि अगर उसे बच्चा चाहिए तो वह अपनी पत्नी को भेजे।

इंडिया टुडे को अपनी आपबीती सुनाते हुए उस व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसके टीम लीडरों ने उसे नमाज पढ़ने, कलमा पढ़ने और टोपी पहनने के लिए मजबूर किया। उसने बताया कि उत्पीड़न की सारी हदें तब पार हो गईं जब आरोपियों में से एक ने उसके निजी जीवन का मजाक उड़ाते हुए कहा कि अगर वह इलाज के बावजूद बच्चा चाहता है, तो उसे अपनी पत्नी को भेजना चाहिए।

उस व्यक्ति के अनुसार, उत्पीड़न 2022 में कंपनी में शामिल होने के कुछ ही समय बाद शुरू हुआ। आरोप है कि उसके टीम लीडर तौसीफ अत्तार और सहकर्मी दानिश शेख ने उसे निशाना बनाना शुरू कर दिया। अधिकारिक पद पर होने के कारण, तौसीफ ने पीड़ित को सभी निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया और उसे थकाए रखने के लिए ज्यादा काम देकर परेशान करता था, जिसमें दूसरों के काम भी शामिल थे।


TCS नासिक की 23 साल कर्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई FIR में दानिश और तौसीफ दोनों का नाम पहले ही दर्ज हो चुका है। महिला ने आरोप लगाया है कि दानिश ने उसे जबरदस्ती चूमने की कोशिश की और उससे शादी करना चाहा। उसने यह भी आरोप लगाया कि दानिश के साथियों, तौसीफ और एचआर एग्जीक्यूटिव निदा खान ने देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और उसकी धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया।

उन्हें पांच अन्य पुरुष आरोपियों और दो महिला आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी की नासिक ब्रांच की कई महिला कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर कुल 9 मामले दर्ज किए हैं।

धर्म बना विवाद का कारण

इंडिया टुडे को दिए अपने बयान में, रामदास स्वामी के एक धर्मनिष्ठ हिंदू अनुयायी, जो नियमित रूप से रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं, ने कहा कि उनकी धार्मिक पहचान विवाद का मुद्दा बन गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सहकर्मी अक्सर हिंदू मान्यताओं का मजाक उड़ाते थे, हिंदू देवी-देवताओं के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और महाराष्ट्र के धार्मिक व सम्मानित व्यक्तियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करते थे।

उत्पीड़न केवल मौखिक दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं था। पीड़ित ने आरोप लगाया कि रात की शिफ्ट के बाद उसे होटलों में ले जाया जाता था और सख्त शाकाहारी होने के बावजूद उस पर मांसाहारी भोजन खाने का दबाव डाला जाता था। जब उसने इनकार किया, तो उसकी मान्यताओं का मजाक उड़ाया गया।

उसने आगे आरोप लगाया कि 2023 में ईद के दिन, तौसीफ उसे अपने घर ले गया, उसे धार्मिक टोपी पहनाई, नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया और उसकी तस्वीरें लीं, जिन्हें बाद में उसे अपमानित करने के लिए कंपनी के ऑफिशियल ग्रुप में शेयर किया गया।

निजी जिंदगी का बार-बार मजाक उड़ाया गया

उस व्यक्ति ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने उसके निजी जीवन को निशाना बनाया और इस बात का मजाक उड़ाया कि शादी के इतने सालों बाद भी उसके और उसकी पत्नी के बच्चे नहीं है। उसने आरोप लगाया कि उन्होंने बेहद अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए कहा कि अगर उसे बच्चा चाहिए तो वह अपनी पत्नी को उनके पास भेज दे।

जब पीड़ित ने विरोध किया तो स्थिति और बिगड़ गई और कार्यस्थल पर झड़प हो गई। उसने आरोप लगाया कि तौसीफ ने उस पर एक मेजपंखे फेंके और उसे जान से मारने की धमकी दी।

उसने तौसीफ, दानिश, शाहरुख और रजा मेमन समेत इस ग्रुप पर महिला कर्मचारियों के बारे में गलत टिप्पणियां करने और उन्हें भी निशाना बनाने का आरोप लगाया। उसने यह भी दावा किया कि जब उसके पिता को लकवा का दौरा पड़ा, तो आरोपियों ने उससे कहा कि अगर वह इस्लाम धर्म अपना ले तो उसके पिता ठीक हो जाएंगे।

पीड़ित का आरोप है कि जब उसने उनकी बात मानना बंद कर दिया, तो उसे नौकरी से निकलवाने के लिए उसके खिलाफ हेड ऑफिस में झूठी शिकायतें की गईं। उसने कहा कि यह उत्पीड़न 2022 से लेकर 23 मार्च 2026 तक चलता रहा।

पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने पहले उससे दोस्ताना संबंध बनाए, फिर अपना असली इरादा जाहिर किया। उसने आरोप लगाया कि उस पर बार-बार धर्म परिवर्तन करने का दबाव डाला गया, जिसमें कलमा का पाठ करने और रुद्राक्ष की माला उतारने के लिए मजबूर करना भी शामिल था।

उसका दावा है कि उनका उद्देश्य उसे मानसिक रूप से तोड़ना था ताकि वह धर्म परिवर्तन के लिए राजी हो जाए। जब उसने विरोध किया, तो उसे जानबूझकर काम पर परेशान किया गया और उकसाया गया।

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