Heatwave Warning: देश के कई राज्यों में सूरज की तपिश और भीषण लू का कहर जारी है। इस जानलेवा मौसम का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि बेजुबान मवेशियों और पशुधन पर भी सबसे ज्यादा पड़ रहा है। ऐसे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पशुपालकों और किसानों के लिए एक स्पेशल चेतावनी जारी की है।
IMD के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी और हीटवेव के कारण मवेशियों के भीतर कई शारीरिक और व्यवहारिक बदलाव आ रहे हैं। अगर समय रहते उनका ध्यान नहीं रखा गया, तो फार्म की बकरियों, गाय-भैंसों और मुर्गियों की जान भी जा सकती है।
ये 4 लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
मौसम विभाग के अनुसार, इंसानों की तरह ही पशुओं को भी 'हीट स्ट्रेस' होता है। इसके चलते उनमें ये गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं:
कम चारा खाना: भीषण गर्मी के कारण पशुओं की भूख कम हो जाती है। वे चारा खाना आधा या बिल्कुल बंद कर देते हैं, जिससे उनका वजन गिरने लगता है।
पानी की कमी और थकान: तेज धूप के कारण मवेशियों के शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है। वे लगातार हांफने लगते हैं और सुस्त होकर बैठ जाते हैं।
दूध और अंडों के उत्पादन में भारी गिरावट: हीट स्ट्रेस का सीधा असर डेयरी फार्म और पोल्ट्री फार्म पर पड़ता है। गाय-भैंसों का दूध उत्पादन कम हो जाता है और मुर्गियां अंडे देना कम कर देती हैं।
बदला हुआ व्यवहार: अत्यधिक गर्मी के कारण मवेशी चिड़चिड़े हो जाते हैं और एक जगह झुंड बनाकर खड़े होने लगते हैं, जिससे सफोकेशन का खतरा बढ़ जाता है।
पोल्ट्री और गोट फार्मिंग वाले किसान बरतें विशेष सावधानी
आईएमडी की यह चेतावनी खासकर बकरी पालन और मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मुर्गियों के शरीर में पसीना सोखने वाली ग्रंथियां नहीं होती हैं, जिसके कारण उन्हें 'हीट स्ट्रोक' बहुत जल्दी आता है। तापमान 40 डिग्री के पार जाते ही पोल्ट्री फार्म्स में मुर्गियों की अचानक मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
भयंकर हीटवेव से बचाने के लिए IMD की ये है सलाह
अगर आप इस जानलेवा मौसम में अपने फार्म और मवेशियों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो मौसम विभाग की इन बातों का पालन जरूर करें:
छाया और ठंडी जगह: मवेशियों को सीधे धूप में बांधने के बजाय हवादार और छायादार टिन शेड या पेड़ों के नीचे रखें।
कूलिंग और वेंटिलेशन: पोल्ट्री फार्म और डेयरी फार्म के भीतर पंखे या एग्जॉस्ट फैन की व्यवस्था करें। मुर्गियों को बचाने के लिए शेड की छतों पर जूट की बोरियां गीली करके डालें या फॉगर का इस्तेमाल करें।
साफ और ठंडा पानी: दिन में कम से कम 3 से 4 बार पशुओं को पीने के लिए साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं। पानी में ओआरएस (ORS) या ग्लूकोज मिलाकर देना और भी फायदेमंद रहेगा।
चराने के समय में बदलाव: बकरियों और अन्य मवेशियों को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर खुले में चराने के लिए बिल्कुल न ले जाएं। उन्हें सुबह जल्दी या शाम के वक्त ही बाहर निकालें।