Jahangir Khan: जिस इलाके में कभी था जहांगीर खान का खौफ, वहीं हाफ पैंट में पुलिस ने पैदल घुमाया

Jahangir Khan: कुछ दिन पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से सड़कों पर घुमाने की प्रथा पर सख्त नाराजगी जताते हुए बंगाल पुलिस से जवाब मांगा था। लेकिन कोर्ट की इस टिप्पणी के बावजूद दक्षिण 24 परगना के फालता में ऐसा नजारा देखने को मिला।

अपडेटेड Jun 12, 2026 पर 10:34 AM
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जहांगीर खान को पुलिस ने इलाके में घुमाया

Jahangir Khan: कुछ दिन पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से सड़कों पर घुमाने की प्रथा पर सख्त नाराजगी जताते हुए बंगाल पुलिस से जवाब मांगा था। लेकिन कोर्ट की इस टिप्पणी के बावजूद दक्षिण 24 परगना के फालता में गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता जहांगीर खान को पुलिस द्वारा विभिन्न इलाकों में पैदल घुमाया गया, जिससे एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया।

बॉलीवुड विलेन 'गब्बर सिंह' से प्रेरित हैं जहांगीर

बता दें कि कभी खुद को फिल्म 'पुष्पा' के किरदार से जोड़ने वाले और 'गब्बर सिंह' से प्रेरित होने का दावा करने वाले जहांगीर खान को सोमवार को भारत-नेपाल सीमा से सटे उत्तर बंगाल के पानीटंकी इलाके से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, उन पर जबरन वसूली समेत कई गंभीर आरोप हैं और उनके खिलाफ कुल सात मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। वहीं, गुरुवार को सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पुलिस जहांगीर खान को इलाके की सड़कों पर पैदल ले जाती हुई दिखाई दे रही है।


अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी हैं जहांगीर

जहांगीर खान को ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बेहद करीब माना जाता है। उन्होंने फालता विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव के दौरान खुद को चुनावी गतिविधियों से दूर रखा था। बताया जाता है कि 21 मई को हुए दोबारा मतदान से ठीक पहले ही वह क्षेत्र से गायब हो गए थे।

गौरतलब है कि जब से पश्चिम में बंगाल बीजेपी की सरकार आई है तभी से हिंसा, जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामलों में कई टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनमें से कई को उनके ही इलाकों में सार्वजनिक रूप से घुमाया गया है।

गिरफ्तार कर सकते हैं, बदनाम नहीं: HC

वहीं, इस प्रथा को लेकर बीते 5 जून को कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने बंगाल पुलिस से तीन हफ्ते के अंदर रिपोर्ट मांगी थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि पुलिस के पास किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार तो है, लेकिन उसे सार्वजनिक रूप से बदनाम या अपमानित करने का नहीं।

क्या कहता है कानून?

ऐसी घटनाओं ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई की सीमाओं और आरोपियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 43(3) के अनुसार, पुलिस को हथकड़ी या विशेष सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल केवल गंभीर अपराधों के मामलों में ही करने की अनुमति है। इनमें संगठित अपराध, आतंकवाद, हत्या, बलात्कार, मानव तस्करी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियां जैसे अपराध शामिल हैं। कानून यह भी कहता है कि ऐसे कदम उठाने का फैसला मामले की परिस्थितियों, सुरक्षा जोखिम और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए।

पहले भी कई हाईकोर्ट दे चुके हैं जांच के आदेश

बता दें कि कोर्ट ऐसे मामलों पर पहले भी चिंता जता चुकी है। इसी साल अप्रैल में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक आरोपी को पुलिस स्टेशन से अदालत तक ले जाते समय जानबूझकर पैदल घुमाने के आरोपों पर जांच के आदेश दिए थे। थे। अदालत ने कहा था कि यदि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के उद्देश्य से ऐसा किया जाता है, तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।

वहीं, जनवरी में राजस्थान हाईकोर्ट ने इन मामलों पर टिप्पणी देते हुए कहा था कि गिरफ्तार व्यक्तियों की तस्वीरें खींचना और उन्हें सार्वजिनक रूप से प्रदर्शित करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

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