हत्या, हिंसा, वीजा पर रोक, प्रदर्शन और तनाव! भारत-बांग्लादेश के रिश्ते क्यों लागातार हो रहे खराब?

Bangladesh Violence: दोनों पक्षों की ओर से वीजा सर्विस रोकने के चलते विश्लेषकों का मानना ​​है कि द्विपक्षीय संबंधों का जल्द सामान्य होना मुश्किल हो सकता है। भले ही वीजा सर्विस बंद करने का फैसला अस्थायी हो सकता है, लेकिन यह इस बात का भी संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच संबंध कितने नाजुक मोड़ पर हैं

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 2:15 PM
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Bangladesh Violence: भारत-बांग्लादेश के रिश्ते क्यों लागातार हो रहे खराब?

2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में संबंध और भी बिगड़ गए हैं। सोमवार (22 दिसंबर) को ढाका ने "नजरअंदाज नहीं की जाने वाली परिस्थितियों" का हवाला देते हुए नई दिल्ली में अपने उच्चायोग और त्रिपुरा में अपने दूतावास में वीजा सर्विस पर रोक लगा दीं।

ये कदम ऐसे समय पर उठाया गया, जब युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के विरोध में देश में एक बार फिर अशांति फैल गई। हादी 2024 में शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के पतन का कारण बने विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा चेहरा थे।

विश्लेषकों के अनुसार, भले ही वीजा सर्विस बंद करने का फैसला अस्थायी हो सकता है, लेकिन यह इस बात का भी संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच संबंध कितने नाजुक मोड़ पर हैं।

सोमवार को, नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग ने कांसुलर और वीजा सर्विस सस्पेंड करते हुए कहा, “अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण, नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग की सभी कांसुलर और वीजा सेवाएं अगली सूचना तक अस्थायी रूप से निलंबित की जा रही हैं। हुई असुविधा के लिए हमें खेद है।”

त्रिपुरा में बांग्लादेश के असिस्टेंट हाई कमीशन ने भी वीजा सेवाओं के निलंबन के संबंध में इसी तरह की घोषणा की, जबकि पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में वीजा एप्लीकेशन प्रोसेस करने का काम सौंपे गए एक प्राइवेट ऑपरेटर ने भी अपनी सेवाएं निलंबित कर दीं।


बांग्लादेश की जवाबी कार्रवाई

वैसे तो बांग्लादेश ने अपने इस कदम का कोई उचित कारण नहीं बताया, लेकिन भारत में कई लोग ऐसा मान रहे हैं कि इससे पहले नई दिल्ली ने बांग्लादेश के बंदरगाह शहर चटगांव से जो वीजा सर्विस सस्पेंड की थी, ढाका ने उसी के जवाब में ये कदम उठाया है

इससे पहले रविवार (21 दिसंबर) को बांग्लादेश में इंडियन वीजा सेंटर ने एक "सुरक्षा घटना" का हवाला देते हुए सेवाएं निलंबित कर दी थींकेंद्र ने कहा, "चटगांव स्थित AHCI (असिस्टेंट हाई कमीशन ऑफ इंडिया) में हाल ही में हुई एक सुरक्षा घटना के कारण, IVC चटगांव में भारतीय वीजा संबंधी सेवाएं 21/12/2025 से अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी।" उन्होंने आगे कहा, "स्थिति की समीक्षा के बाद वीजा सेंटर को फिर से खोलने की घोषणा की जाएगी।"

भारत ने वीजा अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला तब लिया जब बांग्लादेश के कुछ आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने चटगांव में भारत के असिस्टेंट हाई कमीशन पर धावा बोलने की कोशिश की। वहां मौजूद कई प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ओस्मान हादी पर हमला करने वाले गोलीबारी के बाद भारत भाग गए, हालांकि बांग्लादेश ने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया है।

बांग्लादेश और भारत दोनों में विरोध प्रदर्शन

दोनों देशों की ओर से वीजा पर रोक लगाना एक बड़े विवाद का बहुत छोटा सा हिस्सा है। उस्मान हादी की हत्या के बाद, दोनों देशों में लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है।

बांग्लादेश में पिछले हफ्ते हिंसा ने एक ऐसा खौफनाक मोड़ ले लिया, जब बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका में एक युवा कपड़ा कारखाने के मजदूर दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।

मयमनसिंह के ASP अब्दुल्ला अल मामून के अनुसार, कारखाने के अधिकारियों ने शुरू में दावा किया कि दीपू पर फेसबुक पोस्ट में कथित तौर पर "पैगंबर हजरत मुहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी" करने के कारण हमला किया गया था।

हालांकि, जांचकर्ताओं को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि पीड़ित ने फेसबुक पर ऐसा कुछ लिखा या पोस्ट किया हो जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती हो।

इसके अलावा, ढाका में कई इमारतों में आग लगा दी गई, जिनमें देश के दो बड़े अखबार- द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तर भी शामिल हैं।

इधर भारत में सोमवार को कोलकाता में भी बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर दीपू दास के हत्या के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुए। भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में दूसरे पार्टी नेताओं और समर्थकों ने प्रदर्शनकारियों के साथ उच्चायोग के सामने विरोध प्रदर्शन किया और हत्या की निंदा करते हुए बांग्लादेशी अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की।

इसी बीच, अखिल भारतीय मेडिकल छात्र संघ (AIMSA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बांग्लादेश में फंसे भारतीय मेडिकल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए "तत्काल और त्वरित हस्तक्षेप" की अपील की। ​

AIMSA ने एक पत्र में कहा कि उसे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों से "गंभीर और चिंताजनक संदेश" मिल रहे हैं, जिनमें चेतावनी दी गई है कि मौजूदा स्थिति के कारण कई लोग असुरक्षित और अनिश्चित परिस्थितियों में फंसे हैं।

बांग्लादेश और भारत के बीच संबंधों में सुधार के कोई संकेत नहीं

पिछले साल बांग्लादेश में सत्ता से बेदखल होने के बाद से हसीना ने भारत में शरण ली हुई है और तभी से दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच में संबंधों तनाव है।

मोहम्मद यूनुस सरकार के शपथ ग्रहण के बाद अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों को लेकर नई दिल्ली ने चिंता जताई है, जबकि ढाका ने कहा है कि ये आंतरिक मामले हैं और राजनीतिक प्रकृति के हैं, और भारत को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए

ढाका ने कुछ घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और भारतीय मीडिया के कुछ वर्गों की ओर से गलत सूचना और भ्रामक जानकारी फैलाने का भी जिक्र कियाबांग्लादेश ने बार-बार भारत से हसीना को भड़काऊ बयान देने से रोकने का आग्रह किया है, यह तर्क देते हुए कि ऐसे बयान बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण से हसीना और पूर्व मंत्री असदुज्जमान खान को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद बांग्लादेश ने भारत से हसीना के प्रत्यर्पण का भी अनुरोध किया

दोनों पक्षों की ओर से वीजा सर्विस रोकने के चलते विश्लेषकों का मानना ​​है कि द्विपक्षीय संबंधों का जल्द सामान्य होना मुश्किल हो सकता है

भारत के ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध की प्रोफेसर श्रीराधा दत्ता ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया, “भले ही हालात कठिन और असहयोगी लग रहे हैं, लेकिन यह एक अस्थायी झटका है और उम्मीद है कि दोनों पक्ष अपना संपर्क फिर से शुरू करेंगेमुझे लगता है कि बांग्लादेश में चुनाव होने के बाद ही स्थिति सामान्य होगी।”

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