West Asia Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन रेस्क्यू' तेज किया हुआ है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोमवार को जानकारी दी कि ईरान में फंसे 1,777 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इस बेहद जटिल निकासी अभियान में ईरान, अर्मेनिया और अजरबैजान की सरकारों ने भारत का भरपूर सहयोग किया है।
खाड़ी देशों के लिए विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने बताया कि, 'खाड़ी देशों में भारतीय मिशन चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। जहां हवाई क्षेत्र बंद हैं, वहां पड़ोसी देशों के जरिए वीजा और ट्रांजिट की व्यवस्था की जा रही है। 28 फरवरी से अब तक पूरे क्षेत्र से लगभग 7.3 लाख यात्री भारत लौट चुके हैं।'
अर्मेनिया और अजरबैजान के जरिए हुई वतन वापसी
ईरान के ऊपर हवाई क्षेत्र पर पाबंदियों के कारण भारत ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए पड़ोसी देशों के जमीनी रास्तों का इस्तेमाल किया। सबसे ज्यादा 1,545 भारतीयों को ईरान की सीमा से अर्मेनिया ले जाया गया और वहां से उन्हें भारत भेजा गया। वहीं कुल 234 भारतीयों को अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित निकाला गया। भारत ने न केवल अपने नागरिकों, बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका के एक-एक नागरिक को भी सुरक्षित निकालने में मदद की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, 895 भारतीय स्टूडेंट और 345 मछुआरे अर्मेनिया के रास्ते 4 अप्रैल को चेन्नई पहुंचे।
युद्ध में अब तक 8 भारतीयों की मौत
विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि युद्ध के दौरान अब तक 8 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है। सात मृतकों के पार्थिव शरीर भारत लाए जा चुके हैं। आठवें व्यक्ति के अवशेषों को ओमान से वापस लाने के प्रयास जारी हैं।
हवाई यातायात की क्या है स्थिति?
युद्ध के कारण कई देशों का हवाई क्षेत्र बंद है, जिससे यात्रा प्रभावित हुई है। फिलहाल सऊदी अरब और ओमान के एयरस्पेस से उड़ानें जारी हैं। वहीं भारत और यूएई के बीच सीमित उड़ानें चल रही हैं, सोमवार को करीब 90 उड़ानों की उम्मीद है। कुवैत और बहरीन का हवाई क्षेत्र फिलहाल बंद है। यहां फंसे लोगों को सऊदी अरब के वैकल्पिक हवाई अड्डों के जरिए निकाला जा रहा है।