India-Canada relations: भारत और कनाडा राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून लागू करने से जुड़े मुद्दों पर सहयोग के लिए एक 'साझा कार्य योजना' तैयार करने पर सहमत हुए हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देश अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क जैसी पारस्परिक चिंताओं को दूर करने के लिए व्यावहारिक सहयोग की एक व्यापक योजना पर भी सहमत हुए हैं। इसके मुताबिक दोनों देशों ने यह निर्णय शनिवार को ओटावा में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और उनकी कनाडाई समकक्ष नताली ड्रोइन के बीच हुई बैठक के दौरान लिया।
इस कदम को दोनों देशों द्वारा अपने संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। इसमें 2023 में एक खालिस्तानी अलगाववादी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर हुए राजनयिक विवाद के बाद गतिरोध पैदा हो गया था। NSA डोभाल की ओटावा यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दोनों पक्ष अगले महीने की शुरुआत में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की संभावित भारत यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने डोभाल-ड्रोइन के बीच हुई बैठक का विवरण साझा करते हुए रविवार को कहा कि दोनों पक्षों ने अपने देशों और नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई पहलों पर हुई प्रगति को स्वीकार किया। MEA ने एक बयान में कहा, "उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग का मार्गदर्शन करने और संबंधित प्राथमिकताओं पर व्यावहारिक सहयोग के वास्ते एक साझा कार्य योजना पर सहमति जताई है।"
इसमें कहा गया, "बैठक के दौरान यह सहमति बनी कि प्रत्येक देश सुरक्षा और कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करेगा और उनकी संबंधित एजेंसियां कामकाजी संबंधों को मजबूत करेंगी।" बयान के मुताबिक यह महत्वपूर्ण कदम द्विपक्षीय संवाद को सुव्यवस्थित करने और आपसी चिंता के मुद्दों जैसे कि मादक पदार्थों का अवैध प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क को लेकर समय पर सूचना साझा करने में मदद करेगा।
बयान में आगे कहा गया, "दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा नीति और साइबर सुरक्षा मुद्दों पर सूचना साझाकरण पर सहयोग को औपचारिक रूप देने के साथ-साथ घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप धोखाधड़ी और आव्रजन प्रवर्तन से संबंधित सहयोग पर चर्चा जारी रखने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है।"
सूत्रों ने बताया कि बातचीत में ड्रग्स, साइबर खतरों और उग्रवाद पर रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग शुरू करने पर फोकस किया गया। इसमें खालिस्तान से जुड़े ग्रुप्स पर खास ध्यान दिया गया। सूत्रों ने बताया कि इन चर्चाओं से पता चलता है कि ओटावा भारत विरोधी गतिविधियों पर सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से हटकर कानून लागू करने की कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है।