Age Based Restrictions On Social Media: ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर अब भारत सरकार भी बच्चों और किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। दिल्ली में चल रहे 'AI इम्पैक्ट समिट 2026' के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की कि सरकार इस समय विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रही है।
वैश्विक ट्रेंड के साथ चलेगा भारत
आईटी मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दुनिया के कई देशों ने अब यह स्वीकार कर लिया है कि सोशल मीडिया के लिए उम्र की सीमा तय करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार फिलहाल डीपफेक और उम्र की पाबंदी जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा कर रही है। सरकार का उद्देश्य इन नियमों को लागू करने का 'सही और प्रभावी तरीका' ढूंढना है, ताकि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाया जा सके।
ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों का उदाहरण
भारत का यह कदम उन वैश्विक देशों से प्रेरित है जो पहले ही ऐसे कड़े कानून बना चुके है। दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बैन करने वाला दुनिया का पहला देश बना। डेनमार्क ने 15 साल और स्पेन ने हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर पाबंदी लगाने के नियमों को मंजूरी दी है। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है क्योंकि डीपफेक, 'डिजिटल अरेस्ट' और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे है।
दिग्गज टेक कंपनियों पर होगा बड़ा असर
भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है और यहां मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम) और गूगल (यूट्यूब) जैसे प्लेटफॉर्म्स का दुनिया में सबसे बड़ा यूजर बेस है। अगर भारत उम्र की पाबंदी लागू करता है, तो इन टेक दिग्गजों के बिजनेस पर बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि, केन्द्रीय मंत्री ने अभी तक किसी विशेष कंपनी या फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का नाम नहीं लिया है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि सुरक्षा के लिहाज से रेगुलेशन जरूरी है।