Fact-Check: 'ईरान पर हमले के लिए अमेरिकी नौसेना ने किसी भी भारतीय पोर्ट का इस्तेमाल नहीं किया'; भारत ने US मीडिया के दावों को किया खारिज

US-Israel-Iran War: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार (4 मार्च) को ऑनलाइन चल रहे उन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि अमेरिका की नेवी ईरान पर हमले करने के लिए भारतीय पोर्ट्स का इस्तेमाल कर रही है। सरकार का यह बयान MEA के ऑफिशियल फैक्टचेक हैंडल से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए आया

अपडेटेड Mar 05, 2026 पर 9:31 AM
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US-Israel-Iran War: भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि अमेरिकी नौसेना ने किसी भारतीय पोर्ट का इस्तेमाल नहीं किया है

US-Israel-Iran War: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिकी मीडिया के उन दावों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि भारतीय बंदरगाहों (पोर्ट) का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना कर रही है। सरकार ने MEA के ऑफिशियल फैक्टचेक हैंडल से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि अमेरिकी नौसेना ने ईरान पर हमले के लिए किसी भारतीय पोर्ट का इस्तेमाल नहीं किया है। मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट चेक हैंडल ने इन खबरों को पूरी तरह से झूठा और निराधार बताया है।

भारत की यह सफाई एक पुराने US टेलीविजन नेटवर्क 'वन अमेरिका न्यूज (OAN)' की रिपोर्ट के बाद आई है। इसमें दावा किया गया था कि भारतीय नेवी की जगहों का इस्तेमाल अमेरिकी जंगी जहाज ईरानी एसेट्स को टारगेट करने वाले ऑपरेशन करने के लिए कर रहे थे। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा, "फर्जी खबरों से सावधान! अमेरिका स्थित चैनल ओएएन पर किए जा रहे ये दावे कि भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना कर रही है, पूरी तरह से झूठे और निराधार हैं। हम आपको ऐसे आधारहीन और मनगढ़ंत दावों से सावधान करते हैं।"

इस वक्त अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष चल रहा है। इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी के कई देशों पर मिसाइल हमला किया।


पेंटागन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संघर्ष के पहले चार दिनों में अमेरिकी और सहयोगी बलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। ईरान द्वारा दागी जा रही मिसाइलों में भारी कमी आई है। अमेरिकी सेना ने ईरान में काफी अंदर तक हमले बढ़ा दिए हैं। पेंटागन में एक प्रेस ब्रीफिंग में बोलते हुए युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान के सैन्य ढांचे को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने कहा, "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बारे में आज मैं आपके सामने एक स्पष्ट संदेश लेकर खड़ा हूं। अमेरिका निर्णायक, विनाशकारी और निर्दयता से जीत रहा है।" यह अभियान शनिवार तड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर शुरू हुआ था और अभी भी अपने शुरुआती चरण में है। हेगसेथ ने कहा कि पहली बात तो यह है कि इस अभियान को शुरू हुए अभी केवल चार दिन हुए हैं। आंकड़े बदल रहे हैं, स्थिति सामान्य हो रही है और अधिक सेनाएं पहुंच रही हैं।

वायु सेना के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान में 2,000 से अधिक ठिकानों पर पहले ही हमला कर चुका है। आज सुबह तक, अमेरिकी केंद्रीय कमान लगातार प्रगति कर रही है। केन ने कहा कि ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या लड़ाई के पहले दिन की तुलना में 86 प्रतिशत कम हो गई है, जिसमें अकेले पिछले 24 घंटों में 23 प्रतिशत की कमी आई है। ईरान के ड्रोन हमलों में भी भारी गिरावट आई है।

इस बीच, अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले के बाद जारी युद्ध के कारण खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय खौफ के साये में जी रहे हैं जबकि यहां देश में उनके परिवार उनकी सलामती को लेकर फिक्रमंद हैं और उनकी जल्द वापसी का इंतजार कर रहे हैं। ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं जिससे वहां रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ा है और वे घरों में रहने को मजबूर हैं।

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