Bunker Buster Missiles : हाल ही में ईरान-इजरायल युद्ध में आपने 'बंकर-बस्टर' मिसाल का नाम कई बार सुना होगा। 'बंकर-बस्टर' से ही अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट पर हमला किया था और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया था। दरअसल, ईरान ने फोर्डो न्यूक्लियर साइट पहाड़ों के बीच जमीन के 100 मीटर नीचे था, इसीलिए अमेरिका ने बंकर-बस्टर बम गिराने का फैसला किया। ये बम पहले 60 से 70 मीटर तक छेद करके जमीन के अंदर घुसते हैं और फिर फटते हैं। वहीं अब भारत भी इसी तरह की तकनीक पर काम कर रहा है और ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल बना रहा है, जो जरूरत पड़ने पर मजबूत बंकरों को भी आसानी से निशाना बना सके।
भारत बना रहा खतरनाक मिसाइल
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हो रहे युद्धों से सबक लेते हुए भारत अब भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रहा है। इसके तहत भारत ऐसी नई मिसाइल प्रणाली पर काम कर रहा है जो जमीन के नीचे बने ठिकानों को भी आसानी से निशाना बना सके। इस दिशा में बंकर-बस्टर जैसी क्षमताएं विकसित करना भारत की प्राथमिकता बन गई है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अब अग्नि-5 मिसाइल का एक नया वर्जन तैयार कर रहा है, जो खासतौर पर पारंपरिक हथियारों के लिए होगा। यह मिसाइल करीब 7,500 किलो वजनी बंकर-बस्टर वारहेड ले जाने में सक्षम होगी। जहां पहले वाली अग्नि-5 मिसाइल आमतौर पर परमाणु हथियार ले जाती थी और इसकी रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा थी, वहीं नया मॉडल पारंपरिक उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है ताकि दुश्मन के भूमिगत ठिकानों को भी आसानी से निशाना बनाया जा सके।
जमीन के अंदर छिपे दुश्मन पर भी बरसेगा कहर
भारत एक ऐसी नई मिसाइल तैयार कर रहा है जो जमीन के अंदर छिपे हुए दुश्मन के सुरक्षित अड्डों पर सीधा हमला कर सकेगी। यह मिसाइल बम धमाके से पहले लगभग 80 से 100 मीटर गहराई तक जमीन के नीचे घुसेगी, जिससे कंक्रीट जैसी मजबूत परतें भी टूट सकेंगी। इस तकनीक के जरिए भारत अब अमेरिका जैसी आधुनिक सैन्य क्षमताओं की ओर कदम बढ़ा रहा है, जिसने हाल ही में ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों को इसी तरह के बंकर बस्टर हथियारों से निशाना बनाया था।
भारत जिस तकनीक पर काम कर रहा है उसमें बंकर बस्टर हथियारों को सीधे मिसाइल के ज़रिए गिरा सकेगी, जबकि अमेरिका अभी भी इसके लिए महंगे B-2 बॉम्बर विमानों पर निर्भर है। अग्नि-5 मिसाइल के दो नए रूप तैयार किए जा रहे हैं – एक ऐसा वर्जन, जो दुश्मन के ठिकानों पर हवा में ही फटकर हमला करेगा और दूसरा जो जमीन के अंदर छिपे हुए किलेबंद ठिकानों को भेदने के लिए गहराई तक जाकर विस्फोट करेगा। यह भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नई मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले हर वारहेड का वजन करीब आठ टन होगा, जिससे ये पारंपरिक हथियारों में सबसे ताकतवर माने जाएंगे। हालांकि इन मिसाइलों की मारक दूरी पुरानी अग्नि-5 मिसाइल से लगभग 2,500 किलोमीटर कम होगी, लेकिन इनकी जबरदस्त धमाकेदार ताकत और निशाने पर सटीक हमला करने की क्षमता के कारण इन्हें भारत की सैन्य रणनीति में एक असरदार और अहम हथियार माना जा रहा है।
पाकिस्तान और चीन खास निशाने पर
भारत द्वारा तैयार की जा रही ये नई मिसाइलें खासतौर पर पाकिस्तान और चीन जैसे विरोधी देशों में स्थित कमांड सेंटर, मिसाइल ठिकानों और अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में कारगर साबित हो सकती हैं। इन मिसाइलों की रफ्तार इतनी तेज़ होगी कि ये मैक 8 से मैक 20 की गति तक पहुंच सकती हैं, जो इन्हें हाइपरसोनिक मिसाइलों की श्रेणी में लाती है। इस वजह से ये दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में भी सक्षम होंगी।