Trump Tariff On India: भारत-अमेरिका के बीच फाइनल हुई ट्रेड डील, अब 50 की जगह सिर्फ 18% लगेगा टैरिफ; जानिए चीन, जापान सहित अन्य देशों पर कितना है टैरिफ?

Trump Tariff On India: भारत पहले 50% के ऊंचे टैरिफ का सामना कर रहा था, जिसमें 25% का टैरिफ और रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25% अतिरिक्त दंडात्मक लेवी शामिल था। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमति जताई। इसके बदले में अमेरिका ने न केवल दंडात्मक शुल्क हटाया, बल्कि प्रभावी टैरिफ को भी 25% से कम कर 18% कर दिया

अपडेटेड Feb 03, 2026 पर 9:21 AM
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यह समझौता न केवल व्यापारिक दूरियों को कम करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय गुड्स को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच 2 फरवरी को हुआ व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। इस समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% के स्तर से घटाकर मात्र 18% करने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक कदम का स्वागत करते हुए इसे 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया। यह समझौता न केवल व्यापारिक दूरियों को कम करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय गुड्स को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

भारत पहले 50% के ऊंचे टैरिफ का सामना कर रहा था, जिसमें 25% का टैरिफ और रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25% अतिरिक्त दंडात्मक लेवी शामिल था। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमति जताई। इसके बदले में अमेरिका ने न केवल दंडात्मक शुल्क हटाया, बल्कि प्रभावी टैरिफ को भी 25% से कम कर 18% कर दिया, जिससे भारतीय व्यापार के लिए नए द्वार खुल गए है।

एशियाई प्रतिद्वंद्वियों पर भारत की रणनीतिक बढ़त


इस नई टैरिफ दर ने भारत को उसके निकटतम पड़ोसी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले एक बड़ी बढ़त दिला दी है। जहां भारत अब 18% शुल्क का सामना करेगा, वहीं वियतनाम, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे बड़े निर्यातक देशों को 20% टैरिफ देना होगा। यहां तक कि पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों पर भी 19% का शुल्क लागू है। यह 1-2% का अंतर भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय निर्यातकों को कीमत के मोर्चे पर एक बड़ा लाभ देगा, जिससे टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत की पकड़ मजबूत होगी।

वैश्विक तुलना में भारत की मजबूत स्थिति

वैश्विक परिदृश्य पर नज़र डालें तो भारत की स्थिति अब कई विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से काफी बेहतर हो गई है। उदाहरण के तौर पर, ब्राजील (50%), कनाडा (35%), मेक्सिको (25%) और दक्षिण अफ्रीका (30%) जैसे देश भारत की तुलना में बहुत अधिक व्यापारिक बाधाओं का सामना कर रहे है। वर्तमान में केवल जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ (15%) तथा ब्रिटेन (10%) जैसे कुछ चुनिंदा देश ही ऐसे हैं जिन्हें भारत से कम टैरिफ का लाभ मिल रहा है।

भविष्य की राह

पीएम मोदी और ट्रंप के मध्य हुए समझौते के तहत भारत ने भी यह वादा किया है कि वह अमेरिका से आने वाले उत्पादों के लिए अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को धीरे-धीरे कम कर शून्य की ओर ले जाएगा। इस डील से वैश्विक बाजारों में न केवल 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की मांग बढ़ेगी, बल्कि भारत में विदेशी निवेश और रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा होंगे।

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