India-NZ FTA: आगरा के लेदर से लेकर आयुर्वेद तक, न्यूजीलैंड में अब दिखेगा 'मेक इन इंडिया' का दम; ₹1.6 लाख करोड़ के निवेश का 'बंपर' तोहफा!
New Zealand Trade Deal: इस समझौते के लागू होते ही भारत के 8,284 उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना किसी ड्यूटी के एंट्री मिलेगी। इसके साथ ही भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए लगभग 30% उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है। इन पर कोई टैक्स छूट नहीं दी जाएगी
FTA के तहत न्यूजीलैंड को भारत के 70% उत्पादों पर बाजार पहुंच मिलेगी। इसमें मुख्य रूप से ऊन, वाइन, लकड़ी, कोयला और फल शामिल हैं
India-New Zealand Trade Deal: भारत और न्यूजीलैंड के व्यापारिक रिश्तों में आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले एक व्यापक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करेंगे। यह भारत के सबसे तेज संपन्न होने वाले समझौतों में से एक है, जिसे महज 9 महीनों की बातचीत में अंतिम रूप दिया गया है।
पहले दिन से 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस
इस समझौते के लागू होते ही भारत के सभी 8,284 उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में जीरो ड्यूटी यानी बिना किसी टैक्स के एंट्री मिलेगी।
टेक्सटाइल और लेदर: रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडलूम और फुटवियर पर लगने वाला 5-10% टैक्स अब खत्म हो जाएगा। इसका सीधा फायदा आगरा के लेदर उद्योग को मिलेगा, जो भारत के कुल उत्पादन का 75% हिस्सा है।
फार्मा सेक्टर: भारतीय दवाओं और मेडिकल उपकरणों को अब न्यूजीलैंड में बार-बार होने वाले निरीक्षणों से मुक्ति मिलेगी, जिससे लागत कम होगी।
AYUSH को वैश्विक पहचान: पहली बार किसी समझौते में आयुर्वेद, योग, यूनानी और सिद्धा जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को औपचारिक मान्यता दी गई है।
भारतीयों के लिए खुलेंगे रास्ते
समझौते में भारतीय पेशेवरों के लिए 'पीपुल मोबिलिटी' का एक विशेष प्रावधान है। इसके तहत न्यूजीलैंड भारतीय पेशेवरों के लिए एक विशेष वीजा कोटा खोलेगा। इसके तहत हर साल 1,667 नए वीजा जारी किए जाएंगे, और एक समय में अधिकतम 5,000 भारतीय पेशेवर वहां रह सकेंगे। शिक्षा, पर्यटन और डिजिटल सहयोग के क्षेत्रों में भी भारतीयों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
$20 बिलियन का निवेश करेगा न्यूजीलैंड
न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर यानी करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता जताई है। यह निवेश मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, कृषि और टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में आएगा। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार $1.3 बिलियन है, जिसे अगले 5 वर्षों में बढ़ाकर $5 बिलियन करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या-क्या रहेगा समझौते से बाहर?
भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए लगभग 30% उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है। इन पर कोई टैक्स छूट नहीं दी जाएगी:
डेयरी उत्पाद: दूध, मक्खन, पनीर और दही।
कृषि: प्याज, चना, मक्का और बादाम।
अन्य: चीनी, शहद, रत्न एवं आभूषण और हथियार-गोला बारूद।
न्यूजीलैंड को क्या मिलेगा?
न्यूजीलैंड को भारत के 70% उत्पादों पर बाजार पहुंच मिलेगी। इसमें मुख्य रूप से ऊन, वाइन, लकड़ी, कोयला और फल शामिल हैं। इसके अलावा, 'एग्री-टेक्नोलॉजी एक्शन प्लान' के तहत न्यूजीलैंड के विशेषज्ञ भारतीय किसानों को कीवी और सेब के उत्पादन में तकनीकी मदद देंगे।