Election Commission SIR: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अबतक के रुझानों और नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने अबतक की काउंटिंग के हिसाब से 200 सीटों पर बढ़त बना रखी है। इसमें से 14 सीटों पर उसे जीत भी मिल गई है। यानी आजादी के बाद पहली बार राज्य में बीजेपी की सरकार प्रचंड बहुमत से बनने का रास्ता साफ हो गया है। इस बीच पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों को चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आइए आपको आसान शब्दों में समझाते हैं कि SIR का चुनावी नतीजों पर कोई असर पड़ा भी या नहीं।
पश्चिम बंगाल की 293 सीटों (एक सीट पर वोटिंग अब 21 मई को होनी है) के लिए जारी मतगणना के बीच उन 54 विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े सबसे ज्यादा चौंकाने वाले हैं, जहां मतदाता सूची से 5 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। यह वही सीटें हैं जहां कभी ममता बनर्जी की तूती बोलती थी, लेकिन आज यहां भाजपा ने ऐतिहासिक बढ़त बना ली है।
2026 के रुझान: 54 सीटों का नया राजनीतिक भूगोल
रुझानों के अनुसार, इन 'हाई डिलीशन' (High Deletion) वाली 54 सीटों पर राजनीतिक ध्रुवीकरण पूरी तरह बदल गया है। भाजपा इन 54 में से 36 सीटों पर आगे चल रही है, जो कि 2021 के मुकाबले 18 सीटों की सीधी बढ़त है। ममता बनर्जी का गठबंधन (TMC+) इन सीटों पर मात्र 18 सीटों पर सिमट गया है। पार्टी ने यहां अपनी पिछली ताकत की आधी सीटें गंवा दी हैं। इस श्रेणी में कांग्रेस समेत अन्य दलों का सूपड़ा पूरी तरह साफ नजर आ रहा है।
15 साल का इतिहास: शून्य से शिखर तक BJP
इन 54 सीटों का ऐतिहासिक सफर यह बताता है कि कैसे 'SIR' और बदलते समीकरणों ने भाजपा को फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया-
2011: टीएमसी के पास 32 सीटें थी, भाजपा शून्य पर थी।
2016: टीएमसी 34 सीटों पर पहुंची, भाजपा के पास केवल 1 सीट थी।
2021: टीएमसी ने 36 सीटें जीतीं (46.59% वोट शेयर), भाजपा 18 पर थी।
2026 (रुझान): भाजपा ने पासा पलटते हुए 36 सीटों पर बढ़त बना ली है और टीएमसी 18 पर आ गई है।
ऐतिहासिक मतदान ने सबको चौंकाया
दिलचस्प बात यह है कि लाखों नाम हटने के बावजूद पश्चिम बंगाल में इस बार आजादी के बाद का सबसे अधिक 92 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह 2021 के 81.56% से काफी ज्यादा है। ममता बनर्जी ने फिलहाल हार मानने से इनकार करते हुए कहा कि वे मतगणना पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने SIR प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा उन सीटों पर भी जीत रही है जहां नाम कम हटाए गए हैं, इसलिए जीत का श्रेय केवल SIR को देना गलत है।
वैसे तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में SIR की भूमिका आने वाले कई दिनों तक चर्चा और विवाद का विषय बनी रहेगी। लेकिन फिलहाल के रुझान यह साफ कर रहे हैं कि इन 54 सीटों पर हुए बड़े बदलाव ने भाजपा को बंगाल की सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाने में 'किंगमेकर' की भूमिका निभाई है।