भारत ईरानी नौसेना के जहाज IRIS लावन (Lavan) के 100 से अधिक नॉन-एसेंशियल क्रू मेंबर को उनके देश वापस भेज दिया है। हालांकि, यह युद्धपोत अभी भी दक्षिणी बंदरगाह कोच्चि पर ठहरा हुआ है। इस घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इन नाविकों को मानवीय आधार पर भारत की मदद से शुक्रवार देर रात तुर्किये की एयरलाइंस की उड़ान से वापस भेजा गया। बता दें कि, अमेरिकी पनडुब्बी के श्रीलंका के तट पर ईरानी वॉरशिप को निशाना बनाने से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से अपने एक अन्य जहाज, IRIS लावन के लिए मदद मांगी थी। यह जहाज एक्ससाइज और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के सिलसिले में क्षेत्र में मौजूद था। भारत ने उस ईरानी जहाज को डॉकिंग की परमिशन दी थी।
शिप में सवार थे 183 क्रू मेंबर
बताया गया है कि इस युद्धपोत पर कुल 183 क्रू सदस्य थे। इनमें से 50 से अधिक लोग अभी भी भारत में ही हैं, क्योंकि जहाज की मरम्मत का काम चल रहा है और वह अभी कोच्चि बंदरगाह पर ही खड़ा है। हालांकि जहाज के कुछ गैर-जरूरी क्रू सदस्यों को भारत से वापस भेज दिया गया है। ये नाविक एक तुर्की एयरलाइन की उड़ान से भारत से रवाना हुए। सूत्रों के अनुसार, यह विमान पहले श्रीलंका की राजधानी कोलंबो गया था। वहां से यह 80 से अधिक ईरानी नाविकों के शव लेकर कोच्चि पहुंचा था। ये नाविक एक दूसरे ईरानी युद्धपोत के क्रू सदस्य थे, जिसे 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबो दिया था। विमान बाद में कोच्चि से गैर-ज़रूरी ईरानी नाविकों को लेकर रवाना हो गया।
फिलहाल IRIS Lavan जहाज कोच्चि बंदरगाह पर ही खड़ा है और उसकी तकनीकी खराबी को ठीक करने का काम जारी है। सूत्रों के अनुसार, ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan के जो नाविक भारत से रवाना हुए हैं, वे आर्मेनिया की राजधानी येरेवन पहुंचेंगे। वहां से वे सड़क मार्ग के जरिए ईरान जाएंगे। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि वे सुरक्षित तरीके से अपने देश लौट सकें। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत खाड़ी क्षेत्र में फंसे अपने व्यापारिक जहाज़ों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, इस समय दो दर्जन से ज्यादा भारतीय झंडे वाले व्यापारी जहाज होर्मुज स्ट्रेट के दोनों ओर खड़े हैं और हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
इन जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे देश की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ सकता है। इसलिए भारत सरकार लगातार इस दिशा में कूटनीतिक प्रयास कर रही है। इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार रात ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की। बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में संकट शुरू होने के बाद यह दोनों नेताओं के बीच चौथी बातचीत थी। सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। भारत का प्रयास है कि मौजूदा तनाव के बावजूद भारतीय जहाज़ सुरक्षित तरीके से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।