भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता आखिरी कगार पर पहुंच चुका है और जल्द ही इसके पक्के होने की खबर आ सकती है। इस बीच कहा जा रहा है कि इस डील को करने के लिए भारत, अमेरिका के कुछ प्रोसेस्ड, जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फार्म प्रोडक्ट्स के आयात की इजाजत दे सकता है। भारत, अमेरिका से GM मक्का और सोयाबीन के आयात के विरोध में है। ऐसे में नई मंजूरी को एक रियायत के तौर पर देखा जा सकता है।
भारतीय और अमेरिकी अधिकारी पिछले कुछ दिनों से व्यापार समझौते पर मतभेदों को दूर करने के लिए गहन बातचीत कर रहे हैं। यह लक्ष्य लेकर चला जा रहा है कि 9 जुलाई से पहले एक सौदे पर पहुंचा जा सके। 9 जुलाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ की हाई रेट में दी गई राहत की डेडलाइन है। 2 अप्रैल को ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर हाई रेट वाले रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की थी। लेकिन फिर 9 अप्रैल को राहत देते हुए 90 दिनों के लिए टैरिफ की रेट को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था। भारत को लेकर इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि दोनों देश एक समझौते के बहुत करीब हैं।
इस इनबाउंड शिपमेंट पर राजी हो सकते हैं अधिकारी
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि अधिकारी, जानवरों के खाने में इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ प्रोडक्ट, जैसे सोयाबीन मील और 'डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेंस विद सॉल्यूबल्स' (DDGS) के इनबाउंड शिपमेंट पर राजी हो सकते हैं। DDGS, एथेनॉल बनाने के लिए मक्का (कॉर्न DDGS) के स्टार्च फ्रैक्शन को खमीर के साथ फर्मेंटेड करने के बाद बचा हुआ सूखा अवशेष है। DDGS जानवरों के लिए पचने सकने वाले प्रोटीन और एनर्जी का एक बढ़िया सोर्स है।
भारत में बैन है GM खाद्य फसलों की खेती
भारत उन आयातों को लेकर सतर्क रुख रखता है, जिनसे लोकल प्रोडक्शन को टक्कर मिल सकती है और देश के किसानों का नुकसान हो सकता है। भारत GM मक्का और सोयाबीन के आयात का विरोध करता है। इसके अलावा देश के किसानों को भी GM खाद्य फसलों की खेती करने की इजाजत नहीं है। फिर भले ही किस्में, पैदावार में मदद कर सकती हैं।