India vs China: 'भारतीय यात्रियों को निशाना न बनाया जाए'; भारत ने चीन को दी चेतावनी, अपने नागरिकों को भी दी सलाह

India vs China: विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोमवार (8 दिसंबर) को नई दिल्ली में एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि हाल ही में शंघाई एयरपोर्ट पर हुई घटना को लेकर हम अपेक्षा करते हैं कि चीनी अधिकारी यह आश्वासन प्रदान करे कि चीनी एयरपोर्ट से आने-जाने वाले भारतीय नागरिकों को खास तौर पर निशाना नहीं बनाया जाएगा

अपडेटेड Dec 08, 2025 पर 7:47 PM
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MEA ने चीन से कहा कि वह भरोसा दिलाए कि भारतीय यात्रियों को निशाना नहीं बनाया जाएगा

India vs China: भारत ने सोमवार (8 दिसंबर) को अपने नागरिकों से कहा वे चीन की यात्रा करते समय या किसी अन्य डेस्टिनेशन पर जाने के लिए वहां से गुजरते समय उचित सावधानी बरतें। साथ ही भारत ने चीन को भारतीय नागरिकों को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने और मनमाने ढंग से हिरासत में लेने के खिलाफ चेतावनी दी। शंघाई एयरपोर्ट पर भारतीय महिला के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर विदेश मंत्रालय ने फिर स्पष्ट किया कि चीन अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बीजिंग से अपेक्षा की है कि अधिकारी भविष्य में किसी भी चीनी एयरपोर्ट से गुजर रहे भारत के नागरिकों को टारगेट नहीं करेंगे। साथ ही उन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में नहीं लिया जाएगा या परेशान नहीं किया जाएगा।

यह कड़ा बयान पिछले महीने शंघाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली युवती को चीनी अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से कस्टडी में लिए जाने के बाद आया है। पहले भी इस घटना को नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और आपसी समझ का साफ उल्लंघन बताया था।


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हाल ही में शंघाई एयरपोर्ट पर हुई घटना को लेकर हम उम्मीद करते हैं कि चीन के अधिकारी यह आश्वासन देंगे कि चीनी एयरपोर्ट से ट्रांजिट के दौरान भारतीय नागरिकों को चुनिंदा रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा। उन्हें मनमाने ढंग से कस्टडी में नहीं लिया जाएगा या उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा तथा इंटरनेशनल हवाई यात्रा संबंधी नियमों का चीनी पक्ष सम्मान करेगा।"

MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 नवंबर को अरुणाचल प्रदेश की महिला से जुड़ी घटना के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह बात कही। जायसवाल ने कहा, "विदेश मंत्रालय भारतीय नागरिकों को सलाह देता है कि वे चीन की यात्रा करते समय सावधानी बरतें।"

भारत ने कहा है कि यह घटना अनुचित थी। यह अंतरराष्ट्रीय यात्रा को नियंत्रित करने वाले मानदंडों का उल्लंघन करती है। पिछले हफ्ते MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना के बाद राजनयिक तनाव पैदा होने पर अरुणाचल प्रदेश पर भारत के रुख को दृढ़ता से दोहराया था।

क्या है पूरा मामला?

अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली भारतीय नागरिक प्रेमा वांगजोम थोंगडोक ने आरोप लगाया था कि 21 नवंबर को लंदन से जापान जाते समय तीन घंटे के ठहराव के दौरान चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें 18 घंटे तक रोके रखा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने उनका भारतीय पासपोर्ट लेने से मना कर दिया। अधिकारियों ने उनसे कहा कि उनका जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है।

चीन के अधिकारियों ने ट्रांजिट के दौरान महिला के भारतीय पासपोर्ट को वैध मानने से इनकार कर दिया था। इस चौंकाने वाली घटना के बाद भारत ने इस मामले को चीनी पक्ष के सामने जोरदार तरीके से उठाया था।

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MEA ने 25 नवंबर को कहा था, "चीनी अधिकारी अभी भी अपने कामों के बारे में सफाई नहीं दे पाए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा को नियंत्रण करने वाले कई नियमों का उल्लंघन है। चीनी अधिकारियों के काम उनके अपने नियमों का भी उल्लंघन करते हैं, जो सभी देशों के नागरिकों को 24 घंटे तक वीजा फ्री ट्रांजिट की इजाजत देते हैं।" नई दिल्ली ने भी लगातार भारत की इस बात को दोहराया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का एक अहम और अटूट हिस्सा है।

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