Bengal SIR controversy: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में जारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को तुरंत रोकने की अपील की है। TMC प्रमुख ने चेतावनी दी है कि SIR से बड़े पैमाने मतदाताओं के मताधिकार का हनन हो सकता है। साथ हीभारतीय लोकतंत्र की नींव को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती है। सीएम ने कहा कि इससे ऐसा नुकसान होगा जिसकी बाद में भरपाई नहीं हो सकती।
तीन दिसंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR में कथित अनियमितताओं, प्रक्रियागत उल्लंघनों और प्रशासनिक खामियों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंनने कहा कि यह प्रक्रिया अनियोजित, अपर्याप्त तैयारी और आननफानन में की गई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया, "एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और यह हमारे लोकतंत्र के मूल ढांचे और संविधान की भावना पर प्रहार करती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि अत्यधिक जल्दबाजी और पर्याप्त तैयारी की कमी के कारण गंभीर खामियां उत्पन्न हुई हैं।
ममता ने पत्र में लिखा, "यदि इसे वर्तमान स्वरूप में जारी रहने दिया गया, तो एसआईआर से अपूरणीय क्षति होगी। बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार का हनन होगा। साथ ही लोकतंत्र की नींव पर प्रहार होगा।" मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग से तत्काल सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा न करने पर ‘मनमानी और अनियोजित प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए’।
सीएम ने लिखा, "मैं एक बार फिर आपको लिखने के लिए मजबूर हूं ताकि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान देखी जा रही गंभीर गड़बड़ियों, प्रोसेस के उल्लंघन और एडमिनिस्ट्रेटिव कमियों के बारे में अपनी गहरी चिंता रिकॉर्ड पर रख सकूं..."
ममता ने कहा, "मैं आपसे जोर देकर गुज़ारिश करती हूं कि आप तुरंत इन गड़बड़ियों को ठीक करें। कमियों को दूर करें। जरूरी सुधार करें। ऐसा न होने पर इस बिना प्लान की, मनमानी और एडहॉक काम को रोका जाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर इसे इसी तरह जारी रहने दिया गया, तो इसका नतीजा ऐसा नुकसान होगा जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। बड़े पैमाने पर योग्य वोटरों को वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा, और डेमोक्रेटिक शासन के बुनियादी उसूलों पर सीधा हमला होगा"
ममता ने सुनवाई प्रक्रिया के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों (BLA) को कथित रूप से नियुक्त न किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इससे एसआईआर की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
निर्वाचन आयोग को इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए बनर्जी ने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को उसकी देखरेख या निर्देश के तहत की गई किसी भी अवैध, मनमानी या पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के लिए पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।