भारतीय सेना का ‘साइलेंट वॉरियर’ टायसन...जिसके शौर्य पर अभी देश पूरा देश गर्व कर रहा है और उसकी वीरता की चर्चा हर जगह है। वहीं भारतीय सेना इस साइलेंट वॉरियर को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के दौरान घायल हुआ सेना का असॉल्ट डॉग टायसन अब खतरे से बाहर है और तेजी से ठीक हो रहा है। ऑपरेशन त्राशी में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ने मार गिराया था। इस ऑपरेशन में टायसन गोली लगने से घायल हो गया था।
ठीक हो रहा सेना का साइलेंट वॉरियर
बता दें कि, इंडियन आर्मी का जांबाज डॉग ‘टायसन’, आतंकियों की गोली लगने के बावजूद उनके सामने टिका रहा और आतंकियों को उसके अंजाम तक पहुंचाने में सेना की मदद करता रहा। आतंकी गोली चलाते रहे लेकिन टायसन रुका नहीं, डटा रहा। सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने बताया कि, टायसन अब ठीक है और उसकी हालत में सुधार हो रहा है। मंगलवार को व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी शेयर करते हुए बताया कि ऑपरेशन के दौरान टायसन ने आतंकियों के ठिकाने में सबसे पहले प्रवेश किया और पहली गोली भी उसी को लगी। घायल होने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़कर हमला जारी रखा। उसकी बहादुरी की वजह से आतंकियों को जवाबी फायरिंग करनी पड़ी, जिससे उनकी मौजूदगी का पता चल गया और सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली।
टायसन की बहादुरी और तेज कार्रवाई की सराहना करते हुए सेना ने कहा कि, उसके निडर कदम की वजह से व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को बड़ी सफलता मिली। सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान समर्थित तीन आतंकियों को मार गिराया। सेना ने अपने बयान में कहा कि घायल होने के बाद भी टायसन पूरी तरह सतर्क है और तेजी से ठीक हो रहा है। वह ड्यूटी के प्रति समर्पण की मिसाल है और हर मायने में एक सच्चा सैनिक है। सेना ने यह भी साफ किया कि इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और आतंकियों को कहीं भी छिपने की जगह नहीं मिलेगी।
गोली लगने के बाद भी नहीं रूका 'टायसन'
अधिकारियों के मुताबिक, 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज से जुड़े टायसन ने रविवार सुबह सबसे पहले ऑपरेशन क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी का संकेत दिया था। जब जवान चटरू बेल्ट के पास पासेरकुट के घने इलाके में आगे बढ़ रहे थे, तब टायसन टीम से आगे निकलकर संदिग्ध ठिकाने तक पहुंचा। इसी दौरान उसके पैर में गोली लग गई। गोली लगने के बावजूद टायसन पीछे नहीं हटा। वह टीम के साथ बना रहा और आतंकियों तक पहुंचने में जवानों की मदद करता रहा। टायसन को बाद में एयरलिफ्ट कर उधमपुर के आर्मी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
सेना अधिकारियों के अनुसार, टायसन कई बड़े अभियानों का हिस्सा रह चुका है। उसे खास ट्रेनिंग दी गई है, जिससे वह विस्फोटक सामग्री का पता लगा सके, संदिग्ध ठिकानों की पहचान कर सके और सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकवादियों को ट्रैक कर सके। उसके अनुभव और सतर्कता की वजह से जवानों को कठिन और घने इलाकों में छिपे ठिकानों तक पहुंचने में कई बार मदद मिली है।