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Middle East Conflict: भारतीय निर्यातकों को ट्रांसपोर्टेशन और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने का सताने लगा डर

Middle East Conflict: लाल सागर संकट से ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन में रुकावट आने की संभावना है, खासकर स्वेज नहर से गुजरने वाले रूट पर असर पड़ेगा। केप ऑफ गुड होप का रास्ता लंबा और धीमा है, लेकिन यह स्वेज नहर में देरी या रुकावट की संभावना से बचाता है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Mar 01, 2026 पर 10:14 AM
Middle East Conflict: भारतीय निर्यातकों को ट्रांसपोर्टेशन और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने का सताने लगा डर
अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल के साथ-साथ मध्यपूर्व के आधा दर्जन से ज्यादा देशों पर भी हमले किए हैं।

ईरान पर US और इजराइल के जॉइंट अटैक से मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव शुरू हो चुका है। ईरान भी जवाबी हमले कर रहा है। इसके चलते भारतीय निर्यातकों को ट्रांसपोर्टेशन और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने का डर है, जिससे अमेरिका और यूरोप को होने वाले आउटबाउंड शिपमेंट में रुकावट आ सकती है। मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक तनाव रहने से तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका असर इनपुट कॉस्ट और मौजूदा स्थिरता पर पड़ेगा।

अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल के साथ-साथ मध्यपूर्व के आधा दर्जन से ज्यादा देशों पर भी हमले किए हैं। कतर, कुवैत और यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) समेत मिडिल ईस्ट में कई अमेरिकन मिलिट्री बेस को टारगेट बनाया है।

ग्लोबल लॉजिस्टिक्स चैनल में रुकावट हो गई है शुरू

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के प्रेसिडेंट एससी रल्हन ने कहा कि चल रहे झगड़े ने ग्लोबल लॉजिस्टिक्स चैनल में रुकावट डालना शुरू कर दिया है। रल्हन के मुताबिक, “हवाई रास्ते बदले जा रहे हैं, और लाल सागर (रेड सी) और खाड़ी के मुख्य रास्तों से होने वाले समुद्री व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है। अगर रास्ते बदलने में ज्यादा वक्त लगा, तो शिपमेंट को केप ऑफ गुड होप के रास्ते दोबारा भेजना पड़ सकता है। इससे यूरोप और यूनाइटेड स्टेट्स के लिए ट्रांजिट टाइम में लगभग 15-20 दिन और बढ़ सकते हैं।”

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