Delhi Cyber Fraud Case: दिल्ली में 300 करोड़ की इंटरनेशनल साइबर ठगी का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 11 गिरफ्तार
Delhi Cyber Fraud Case: दिल्ली पुलिस ने 2,000 से अधिक शिकायतों और 300 करोड़ रुपये से अधिक के घोटालों से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना और 10 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। इसकी जानकारी अधिकारियों ने रविवार को दी।
दिल्ली में 300 करोड़ की इंटरनेशनल साइबर ठगी का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 11 गिरफ्तार
Delhi Cyber Fraud Case: दिल्ली पुलिस ने 2,000 से अधिक शिकायतों और 300 करोड़ रुपये से अधिक के घोटालों से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना और 10 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। इसकी जानकारी अधिकारियों ने रविवार को दी।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जो कई राज्यों में काम कर रहा था और इसके तार विदेशों, खासकर कंबोडिया से जुड़े हुए हैं।
100 से ज्यादा फर्जी कंपनी, 260 से अधिक बैंक खातों की हुई पहचान
पुलिस ने बताया, "हमने अब तक 100 से अधिक फर्जी कंपनियों से जुड़े 260 से अधिक बैंक खातों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। गिरोह से जुड़ी शिकायतों की कुल संख्या 2,567 है।"
मुख्य आरोपी करण कजारिया को उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद 3 अप्रैल को कोलकाता एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। डीसीपी (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम ने बताया कि उसे आगे की जांच के लिए एक दिन बाद दिल्ली लाया गया।
पीड़ित से 31.45 लाख रुपये की धोखाधड़ी
यह मामला शहर के निवासी सुल्तान की शिकायत के बाद सामने आया, जिसने आरोप लगाया कि उसे एक निवेश योजना में फंसाकर 31.45 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई।
पुलिस ने बताया कि पीड़ित को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन डाउनलोड करने और उसमें पैसा लगाने के लिए राजी किया गया था। हालांकि, जब उसने पैसे निकालने की कोशिश की, तो एप्लिकेशन ने काम करना बंद कर दिया और ग्रुप से संपर्क टूट गया।
जांच क्राइम ब्रांच को सौंपा गया
अधिकारी ने बताया, "उत्तर-पूर्वी इलाके के साइबर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई और बाद में जांच के लिए इसे क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।"
जांच में सामाने आया की इस गिरोह ने पीड़ितों को लुभाने के लिए फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ग्रुप बनाए थे। ये लोग बिचौलियों के जरिए फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) इस्तेमाल करते थे और खतरनाक ऐप के जरिए लोगों की बैंकिंग जानकारी, जैसे OTP, चुरा लेते थे।
पुलिस के मुताबिक, ठगी से जुटाए गए पैसे को कई बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि जरूरी जानाकरी छुपाई जा सके।
डीसीपी ने दी जानकारी
डीसीपी ने बताया, "काजारिया, जिसे मुख्य सरगना माना जा रहा है, विदेशी ऑपरेटरों के साथ सीधे संपर्क बनाए रखता था और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसों का लेन-देन करवाता था।"
डीसीपी ने आगे बताया कि वह भारतीय ऑपरेटरों और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों के बीच कड़ी का काम करता था। वह फर्जी बैंक खाते बनवाने और एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शेयर करने में भी शामिल था।
पुलिस ने बताया कि काजारिया विदेशी धोखाधड़ी नेटवर्क से संबंध स्थापित करने और उन्हें मजबूत करने के लिए अक्सर विदेश यात्रा करता था और भारत से बाहर रहकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करता था।
एयरपोर्ट से आरोपी गिरफ्तार
तकनीकी निगरानी की मदद से जांचकर्ताओं ने नेटवर्क का पता कोलकाता तक लगाया, जहां कई बैंक खाते और फर्जी संस्थाएं संचालित हो रही थीं। भारत पहुंचने पर काजारिया को एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया और हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर इस सिंडिकेट में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। डीसीपी ने यह भी बताया कि उसके नेटवर्क से जुड़े खाते राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 2,500 से अधिक शिकायतों और 300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित थे।
जांच में पता चला कि यह गिरोह पिछले 4-5 सालों से एक्टिव था और कई राज्यों में बड़े पैमाने पर अपना धंधा चला रहा था।
मोबाइल फोन, सिम कार्ड समेत कई जरूरी दस्तावेज बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 48 मोबाइल फोन, 258 सिम कार्ड, कई ATM कार्ड और चेकबुक, चार लैपटॉप और कई बैंकिंग और KYC दस्तावेज बरामद किए। इसके अलावा, 19 लाख रुपये की धनराशि भी जब्त कर ली गई है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।