होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय टैंकरों को रास्ता मिलने के दावे पर ईरान का पलटवार, बोला- 'नहीं मिलेगी छूट'

Iran-Strait of Hormuz: एक रिपोर्ट में कहा गया था कि, ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। सूत्रों ने संकेत दिया था कि दो भारतीय टैंकर 'पुष्पक' और 'परिमल' इस रणनीतिक रास्ते से बिना किसी रुकावट के निकल रहे हैं, जबकि ईरान ने भारतीय टैंकरों को किसी विशेष छूट या अनुमति देने की बात को सिरे से खारिज कर दिया है

अपडेटेड Mar 12, 2026 पर 12:16 PM
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सूत्रों ने संकेत दिया था कि दो भारतीय टैंकर 'पुष्पक' और 'परिमल' इस रणनीतिक रास्ते से बिना किसी रुकावट के निकल रहे हैं

Strait of Hormuz: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर गहरा संकट छाया हुआ है। इस बीच भारतीय टैंकरों की आवाजाही को लेकर खबरें और ईरान का आधिकारिक रुख पूरी तरह अलग-अलग दिशा में इशारा कर रहे हैं।

दरअसल एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया कि, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत का बड़ा असर देखने को मिला है और ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। सूत्रों ने संकेत दिया था कि दो भारतीय टैंकर 'पुष्पक' और 'परिमल' इस रणनीतिक रास्ते से बिना किसी रुकावट के निकल रहे हैं, जबकि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर अभी भी सख्त प्रतिबंध लागू हैं।

ईरान ने दावों का किया खंडन


हालांकि, इस राहत भरी खबर के साथ ही यह भी सामने आया कि ईरान ने आधिकारिक तौर पर इन दावों को स्वीकार नहीं किया है। ईरान ने भारतीय टैंकरों को किसी विशेष छूट या अनुमति देने की बात को सिरे से खारिज कर दिया है।

थाई जहाज पर हमले ने बढ़ाई थी चिंता

यह पूरा विवाद ऐसे समय में गहराया है जब होर्मुज में जहाजों पर हमले बढ़े हैं। हाल ही में थाईलैंड के जहाज 'मयूरी नारी' को निशाना बनाया गया था। यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के खलीफा पोर्ट से गुजरात के कंडला पोर्ट की तरफ आ रहा था। इस समुद्री रास्ते से गुजरते समय एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने जहाज पर हमला किया, जिससे उसमें आग लग गई और एक इमरजेंसी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा।

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क्यों अहम है 'होर्मुज जलडमरूमध्य'?

ईरान और ओमान के बीच स्थित यह 55 किलोमीटर चौड़ा रास्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 31% (करीब 1.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन) इसी रास्ते से गुजरता है। इराक, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों का तेल और दुनिया भर की LNG सप्लाई इसी गलियारे पर निर्भर है। यहां थोड़ी सी भी रुकावट दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों में आग लगा सकती है।

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