अंतरिक्ष में खो गए 16 सैटेलाइट, ISRO को लगातार दूसरा झटका, PSLV रॉकेट फिर हुआ 'फेल'!
PSLV का 64वां मिशन, PSLV-C62, जिसमें EOS-N1 को ले जाया गया था, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:18 बजे रवाना हुआ था। 2025 में भी ये लॉन्चिंग व्हीकल फेल हुआ था, जिस वजह से ये फ्लाइट इसके लिए बड़ी अहम थी
ISRO को लगातार दूसरा झटका, PSLV रॉकेट हुआ 'फेल', अंतरिक्ष में खो गए 16 सैटेलाइट!
भारत के पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) मिशन में सोमवार को लॉन्चिंग के बाद एक खराबी आ गई। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने भी इसकी पुष्टि की और बताया कि रॉकेट के तीसरे चरण के दौरान एक डिस्टर्बेंस देखा गया। ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और स्पेस एजेंसी जल्द से जल्द बाकी जानकारी देगी। हालांकि, उन्होंने मिशन को सफल या असफल घोषित करने से परहेज किया।
PSLV का 64वां मिशन, PSLV-C62, जिसमें EOS-N1 को ले जाया गया था, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:18 बजे रवाना हुआ था। 2025 में भी ये लॉन्चिंग व्हीकल फेल हुआ था, जिस वजह से ये फ्लाइट इसके लिए बड़ी अहम थी।
शुरुआत हुई सही, थर्ड स्टेज में खराबी
ISRO के अनुसार, लॉन्चिंग के पहले कुछ मिनट योजना के अनुरूप रहे। चार स्टेज वाले पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के पहली और दूसरी स्टेज ने सामान्य रूप से प्रदर्शन किया।
हालांकि, तीसरे चरण के दौरान समस्याएं पैदा हुईं। रॉकेट की दिशा में गड़बड़ी दिखी। डॉ. नारायणन ने बाद में कहा कि मिशन अपेक्षित रास्ते पर नहीं चल सका। उन्होंने इसे सफलता या असफलता नहीं बताया।
आमतौर पर PSLV के तीसरे चरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी आने से मिशन लगभग पूरी तरह से फेल हो जाता है।
2025 के फेल के बाद किया कमबैक
NDTV के मुताबिक, PSLV-C62 को लॉन्चिंग व्हीकल के लिए एक कमबैक मिशन के लिए तैयार किया गया था। 2025 में, PSLV का केवल एक लॉन्च हुआ था, जो असफल रहा था। ISRO ने तब बताया, वो फेल्योर भी रॉकेट के तीसरे स्टेज के दौरान हुआ था।
मानक प्रक्रिया के अनुसार, इसरो ने 2025 मिशन के बाद एक विश्लेषण समिति बनाई थी। हालांकि, उस समिति के नतीजे कभी सार्वजनिक नहीं किए गए, जिससे विफलता का सटीक कारण अब तक सामने नहीं आया।
इसके बावजूद, ISRO ने 2026 की अपनी पहली लॉन्चिंग में PSLV-C62 को लॉन्च करने का निर्णय लिया। PSLV-C62 में कुल 16 सैटेलाइट थीं, जिनमें EOS-N1 और अन्वेषा नाम की सर्विलांस सैटेलाइट थी, जिसे DRDO ने तैयार किया था।
ISRO और स्टार्टअप्स पर असर
अगर मिशन को आखिरकार असफल घोषित किया जाता है, तो यह PSLV के 64 लॉन्च में पांचवीं असफलता होगी। 63वीं उड़ान तक PSLV के चार असफल मामले थे।
64 लॉन्च में पांच असफलताएं बुरी नहीं मानी जातीं, लेकिन यह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए झटका होगा। यह झटका सिर्फ ISRO तक सीमित नहीं है। इस मिशन में ब्राजील, नेपाल और ब्रिटेन के सैटेलाइट थे।
भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स भी प्रभावित हुए। हैदराबाद की ध्रुवा स्पेस के सात सैटेलाइट PSLV-C62 पर थे। यह मिशन का बड़ा कमर्शियल हिस्सेदार था।
PSLV को मजबूत और भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है। यह भारत के कमर्शियल स्पेस टारगेट का केंद्र है। भारत HAL और L&T के कंसोर्टियम से पहला इंडस्ट्री-मेड PSLV लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।
अभी तक ISRO ने PSLV-C62 को सफल या असफल नहीं कहा। लेकिन डॉ. नारायणन का बयान कि मिशन अपेक्षित रास्ते पर नहीं चला, चिंता बढ़ा रहा है। लगता है उद्देश्य पूरे नहीं हुए। एक बार नतीजा पक्का हो, तो ISRO और PSLV पर निर्भर स्टार्टअप्स पर बड़ा असर पड़ेगा।