सरकार ने मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर एक बड़ा एलान किया है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने 22 अक्टूबर को यह ऐलान किया है। इसमें बताया गया है कि सरकार के किस लेवल के अधिकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 'टेक डाउन' नोटिस भेज सकते हैं। टेक डाउन नोटिस का मतलब उस आदेश से है, जो सरकार किसी मीडिया प्लेटफॉर्म को किसी कंटेंट को हटाने के लिए भेजती है।
नए नियम 15 नवंबर से लागू हो जाएंगे
Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने कहा है कि सिर्फ ज्वाइंट सेक्रेटरी या उससे ऊपर के रैंक का सीनियर अधिकारी या लॉ एनफोर्समेंट के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस या इसके ऊपर के अधिकारी आईटी एक्ट के सेक्शन 79(3)(b) के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को टेक डाउन नोटिस भेज सकते हैं। यह नियम 15 नवंबर से लागू हो जाएगा।
अभी क्या हैं नोटिस भेजने के नियम
अभी जूनियर अधिकारी टेक डाउन ऑर्डर्स पास करते हैं। उदाहरण के लिए किसी राज्य में सब इंस्पेक्टर या असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर्स रैंक के पुलिस अधिकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को डेट डाउन ऑर्डर भेज सकते हैं। सरकार ने इस नियम में बदलाव के लिए इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स, 2021 के रूल 3(1)(d) में संशोधन किया है। इसके अलावा MeitY ने डीपफेक पर अंकुश लगाने के लिए आईटी रूल्स में कुछ बदलाव करने का प्रस्ताव भी पेश किया है।
सरकार के काम करने के तरीके में जिम्मेदारी बढ़ेगी
MeitY ने कहा है कि ऐसे मामलों में जहां ज्वाइंट सेक्रेटरी की नियुक्ति नहीं हुई है, उनमें डायरेक्टर या उस रैंक के बराबर का अधिकारी टेक डाउन ऑर्डर भेजने के लिए अथॉराइजिंग एजेंसी के रूप में काम कर सकता है। MeitY मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "हमने इस बदलाव के जरिए सरकार के काम करने के तरीके में जिम्मेदारी का स्तर बढ़ाया है।"
नोटिस का पालन नहीं करने पर हार्बर प्रोविजन खत्म हो जाएगा
अगर आईटी एक् के सेक्शन 79(3)(b) के तहत भेजे गए नोटिस का पालन करने में इंटरमीडियरी नाकाम रहता है तो उस प्लेटफॉर्म का सेफ हार्बर प्रोविजन खत्म किया जा सकता है। आईटी एक्ट के तहत यह प्रोविजन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को थर्ड पार्टी की तरफ से पोस्ट किए कंटेट के मामले में इम्यूनिटी देता है। सरकार ने यह भी कहा है कि अफसरों की तरफ से भेजे जाने वाले ऐसे नोटिस में लीगल बेसिस और वैधानिक प्रावधान स्पष्ट रूप से बताने होंगे।