Kanpur Lamborghini Crash: पुलिस ने की गंभीर चूक! कोर्ट ने उठाए गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल, कैसे मिली शिवम मिश्रा को जमानत?

Kanpur Lamborghini Crash: शिवम मिश्रा, जो तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा है, उसे सुबह करीब 10 बजे अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए 20,000 रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। यह जानकारी उनके वकील अनंत शर्मा ने दी

अपडेटेड Feb 12, 2026 पर 6:38 PM
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Kanpur Lamborghini Crash: कैसे मिली शिवम मिश्रा को जमानत?

कानपुर की एक स्थानीय अदालत ने पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए VVIP परिवार से जुड़े शिवम मिश्रा को गुरुवार को गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद जमानत दे दी। शिवम मिश्रा को चार दिन पहले हुए लेम्बोर्गिनी हादसे के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें छह लोग घायल हो गए थे।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तारी से जुड़ी प्रक्रियाओं में गंभीर गलतियां कीं। अदालत के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत सही नोटिस दिए बिना गिरफ्तारी की गई और सुप्रीम कोर्ट के ‘अर्नेश कुमार Vs बिहार राज्य’ (2014) फैसले के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ। इस फैसले में कहा गया है कि जिन मामलों में सजा सात साल से कम है, उनमें गिरफ्तारी अपवाद होनी चाहिए।

शिवम मिश्रा, जो तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा है, उसे सुबह करीब 10 बजे अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए 20,000 रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। यह जानकारी उनके वकील अनंत शर्मा ने दी।


यह हादसा रविवार दोपहर करीब 3 बजे हुआ था। करीब 10 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की इटली की लग्जरी स्पोर्ट्स कार लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो ने कानपुर की VIP रोड पर पैदल चल रहे लोगों और गाड़ियों को टक्कर मार दी थी।

हादसे में घायल 18 साल के ई-रिक्शा ड्राइवर मोहम्मद तौफीक ने शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, बाद में आरोपी के वकील ने दावा किया कि तौफीक कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाना नहीं चाहता है और बचाव पक्ष का उससे समझौता हो गया है।

पुलिस के अनुसार, CCTV फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर शुरुआती जांच में कार तेज रफ्तार में चल रही थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ निजी सुरक्षाकर्मी एक व्यक्ति, जिसे शिवम मिश्रा बताया जा रहा है, को ड्राइवर सीट से बाहर निकालते और दूसरी SUV में ले जाते दिखाई दे रहे हैं।

शुरुआत में दर्ज FIR में “अज्ञात ड्राइवर” का नाम था, लेकिन बाद में शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर शिवम मिश्रा का नाम जोड़ा गया।

बुधवार की सुनवाई में अदालत ने शिवम के ड्राइवर मोहन लाल की सरेंडर अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि FIR में उसका नाम नहीं है और उपलब्ध साक्ष्य शिवम मिश्रा की ओर इशारा करते हैं।

हालांकि, शिवम के पिता और उनके वकील का कहना है कि हादसे के समय वह गाड़ी नहीं चला रहे थे। उनका दावा है कि ड्राइवर मोहन लाल ही कार चला रहा था और शिवम की तबीयत खराब हो गई थी, जिससे हादसा हो सकता है। केके मिश्रा ने यह भी कहा कि कार में तकनीकी खराबी थी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन सभी दावों की जांच की जाएगी। मामले में मेडिकल और फॉरेंसिक जांच भी की जा सकती है। जांच अभी जारी है।

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