कानपुर में हुए हाई-प्रोफाइल लेम्बोर्गिनी दुर्घटना मामले में एक नया मोड़ आ गया है। ड्राइवर मोहन ने दावा किया कि हादसे के समय कार वही चला रहा था, न कि तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा। उसने कहा कि टक्कर से ठीक पहले शिवम को दौरा पड़ा था। मोहन ने News18 से कहा, “हादसे के समय मैं गाड़ी चला रहा था। अचानक उन्हें दौरा पड़ा। गाड़ी धीरे चल रही थी और वह मेरे ऊपर गिर गए। मैं बहुत डर गया। एक हाथ से मैं उन्हें संभाल रहा था। तभी कार ने एक थ्री व्हीलर को टक्कर मारी, डिवाइडर पर चढ़ गई और फिर रुक गई।”
मोहन के मुताबिक, वह एक साथ गाड़ी और शिवम दोनों को संभालने की कोशिश कर रहा था। उसने कहा, “मैं गाड़ी से बाहर निकला और उन्हें ड्राइवर सीट पर खींचकर बैठाया। जब पुलिस आई तो मैं बाहर खड़ा था। कांच टूटने के बाद मैं नीचे से बाहर आया।”
यह बयान ऐसे समय आया है, जब इस बात को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं कि करीब 10 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत वाली लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो कार को, हादसे के समय कौन चला रहा था। यह दुर्घटना रविवार दोपहर करीब 3 बजे कानपुर के ग्वालटोली इलाके की VIP रोड पर हुई, जहां कार ने पैदल चल रहे लोगों को टक्कर मार दी।
शिवम के पिता के.के. मिश्रा और उनके वकील का कहना है कि शिवम गाड़ी नहीं चला रहा था, बल्कि मोहन चला रहा था। उनका यह भी दावा है कि शिवम को मिर्गी की बीमारी है और वह इस समय दिल्ली के अस्पताल में भर्ती है। परिवार ने तेज रफ्तार या नशे में गाड़ी चलाने के आरोपों से भी इनकार किया है।
हालांकि, कानपुर पुलिस ने इन दावों को खारिज कर दिया है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि CCTV फुटेज, चश्मदीद गवाहों और अन्य सबूतों से साफ है कि हादसे के समय शिवम मिश्रा ही गाड़ी चला रहा था। अधिकारियों ने यह भी कहा कि मौके के कुछ वीडियो में लोगों को एक व्यक्ति को ड्राइवर सीट से बाहर निकालते हुए देखा गया है, जिसे शिवम बताया जा रहा है।
FIR में पहले अज्ञात ड्राइवर का नाम था, लेकिन बाद में इसे अपडेट कर शिवम मिश्रा को आरोपी बनाया गया। कार को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने कहा है कि बचाव पक्ष की दलीलों से जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस मामले ने राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में कानूनी कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।