Kaveri Engine: तेजस के लिए फिट नहीं बैठ रही है कावेरी इंजन? DRDO चीफ ने बताई बड़ी वजह

DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने कहा कि एयरो-इंजन विकसित करने में काफी लंबा समय लगता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में कहीं भी कोई नया इंजन पूरी तरह तैयार होकर किसी विमान में इस्तेमाल होने लायक बनने में 10 से 13 साल लगा देता है। उन्होंने कहा कि अगर इस साल CCS से मंजूरी मिल जाती है, तो नया इंजन 2035–36 तक पूरी तरह तैयार हो सकता है

अपडेटेड Feb 02, 2026 पर 6:58 PM
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगातार भारत अपने डिफेंस सेक्टर में एडवांस टेक्नोलॉजी पर जोर दे रहा है।

भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगातार अपने डिफेंस सेक्टर में एडवांस टेक्नोलॉजी पर जोर दे रहा है। भारत अपना फाइटर जेट भी बना रहा है। वहीं DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने सोमवार को 'कावेरी इंजन' को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने सोमवार को कहा कि भारत में बना कावेरी इंजन, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के लिए ज़रूरी थ्रस्ट पूरी नहीं कर पा रहा है। बता दें कि, DRDO द्वारा विकसित ‘कावेरी इंजन’ स्वदेशी जेट इंजन प्रोजेक्ट है, जिसे आने वाले वर्षों में डिफेंस और एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म्स में शामिल करने की तैयारी है। कावेरी इंजन भारतीय फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम्स जैसे LCA तेजस, AMCA और ड्रोन प्रोजेक्ट्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

कावेरी इंजन में कम रहा थ्रस्ट

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने बताया कि कावेरी इंजन ने अच्छा प्रदर्शन किया है और 72 किलो न्यूटन (kN) तक का थ्रस्ट दिया है। लेकिन तेजस विमान को ठीक तरह से उड़ान भरने के लिए 83 से 85 kN थ्रस्ट की ज़रूरत होती है। उन्होंने साफ कहा कि कावेरी इंजन अपने मौजूदा रूप में तेजस की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंजन की क्षमता अच्छी है, लेकिन थ्रस्ट थोड़ा कम रह गया है। इसके साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी दी कि कावेरी इंजन के एक बदले हुए डेरिवेटिव को अनमैंड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (UCAVs) के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आफ्टर बर्नर के बिना यह इंजन भारत के ड्रोन और अनमैंड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में इस्तेमाल किया जाएगा।


कब तक तैयार होगा इंजन

DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने कहा कि एयरो-इंजन विकसित करने में काफी लंबा समय लगता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में कहीं भी कोई नया इंजन पूरी तरह तैयार होकर किसी विमान में इस्तेमाल होने लायक बनने में 10 से 13 साल लगा देता है। उन्होंने कहा कि अगर इस साल CCS से मंजूरी मिल जाती है, तो नया इंजन 2035–36 तक पूरी तरह तैयार हो सकता है। कामत ने यह भी बताया कि भारत के भविष्य के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के पहले दो स्क्वाड्रन शुरुआत में GE F414 इंजन के साथ उड़ान भरेंगे। स्वदेशी इंजन को बाद के चरण में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने DRDO के भविष्य के फोकस पर भी बात की। उन्होंने कहा कि संगठन अब अनमैंड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (AI-ML) और एडवांस्ड मटीरियल जैसी नई तकनीकों पर काम कर रहा है। ये सभी तकनीकें आने वाले समय में भारत द्वारा बनाए जाने वाले रक्षा सिस्टम में इस्तेमाल की जाएंगी।

 लंबे समय से विकसित कर रहा है DRDO

बता दें कि कावेरी इंजन एक लो-बाईपास, ट्विन-स्पूल टर्बोफैन इंजन है, जिसे DRDO के तहत काम करने वाले गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) ने डिज़ाइन किया है। इस इंजन की योजना पहली बार 1980 के दशक में बनाई गई थी। इसका मकसद भारत के तेजस लड़ाकू विमान के लिए विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम करना था। कावेरी इंजन को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि ज्यादा रफ्तार और ऊंचे तापमान पर भी इसकी ताकत (थ्रस्ट) ज्यादा न घटे। इसी वजह से इसमें फ्लैट-रेटेड डिज़ाइन का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा, इंजन को भरोसेमंद बनाने के लिए इसमें ट्विन-लेन फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) सिस्टम लगाया गया है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर नियंत्रण के लिए मैनुअल ओवरराइड की सुविधा भी दी गई है।

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