संसद के बजट सत्र में आए दिन हंगामा देखने को मिल रहा है। बजट सत्र के दौरान संसद में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की किताब को लेकर एक बार फिर जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। इसी बीच, मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन के कामकाज में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सचिवालय को सौंपा है।
राहुल गांधी ने नहीं किया साइन
बता दें कि मंगलवार को विपक्ष के सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लोकसभा महासचिव को रूल 94(सी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। इस नोटिस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि इस पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस का मानना है कि संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष के नेता द्वारा स्पीकर को हटाने की मांग वाली याचिका पर साइन करना उचित नहीं माना जाता। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ा हुआ है।
118 सांसदों ने किया समर्थन
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर लोकसभा में नियम 94C (रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस) के तहत आधिकारिक तौर पर दिया गया। कांग्रेस के अनुसार, इस नोटिस पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इस प्रस्ताव को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत कई दलों का समर्थन मिला है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अभी तक इस पर साइन नहीं किए हैं।
विपक्ष ने लगाए हैं ये आरोप
नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि स्पीकर उन्हें बार-बार सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने का मौका नहीं दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के दौरान राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। साथ ही, कई विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया, लेकिन भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ उनकी पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई टिप्पणियों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष पर पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि इस मुद्दे पर जल्द ही कदम उठाया जाएगा। उनका कहना था कि संसदीय परंपराओं के बावजूद विपक्ष के नेता को सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी सदन के कामकाज पर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले स्पीकर के सामने एक औपचारिक अपील की जानी चाहिए।
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर स्पीकर दो से तीन दिनों के भीतर उस अपील पर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उनकी पार्टी प्रस्ताव का समर्थन करने पर विचार करेगी। वहीं सरकार ने विपक्ष के इस कदम को ज्यादा महत्व नहीं दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के पास प्रस्ताव पास कराने के लिए जरूरी संख्या नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है।