viral video: लद्दाख में मोबाइल फोन पर अचानक दिखाने लगा चीन का समय? वीडियो हुआ वायरल, जानिए क्या है मामला

Ladakh mobile showing China time: लद्दाख के वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक भारतीय मानक समय (IST) की जगह चीन का स्टैंडर्ड टाइम (Beijing Time) दिखने लगा, जो भारतीय समय से 2 घंटे और 30 मिनट आगे है। इस कथित वीडियो पर एक नई बहस शुरू हो गई है

अपडेटेड Jun 24, 2026 पर 10:27 PM
Ladakh mobile showing China time: LAC के पास यात्रा कर रहे लोगों के मोबाइल में अपने-आप China Standard Time सेट होने का दावा किया

Ladakh mobile showing China time: लद्दाख से हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। लद्दाख के वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) की जगह चीन का स्टैंडर्ड टाइम (Beijing Time) दिखने लगा, जो भारतीय समय से 2 घंटे और 30 मिनट आगे है। एक वीडियो में दावा किया गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के नजदीक यात्रा कर रहे कुछ लोगों के मोबाइल फोन अचानक भारतीय समय (IST) से बदलकर China Standard Time (CST) दिखाने लगे।

कथित वायरल वीडियो में फोन की स्क्रीन पर समय क्षेत्र बदलने का नोटिफिकेशन दिखाई देता है। इसमें बताया गया है कि डिवाइस का समय चीन के टाइम जोन के अनुसार सेट हो गया है। बताया जा रहा है कि यह घटना सीमा के बेहद करीब वाले इलाके में हुई।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?


विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में कई बार पड़ोसी देशों के मोबाइल नेटवर्क सिग्नल स्थानीय नेटवर्क से ज्यादा मजबूत हो सकते हैं। यदि फोन में ऑटोमैटिक टाइम और टाइम जोन सेटिंग्स एक्टिव हों, तो डिवाइस विदेशी नेटवर्क की जानकारी के आधार पर समय बदल सकता है।

हालांकि, इस कथित घटना को लेकर कोई आधिकारिक सुरक्षा चिंता नहीं जताई गई है। लेकिन इसने सीमा क्षेत्रों में दूरसंचार नेटवर्क और कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है।

आखिर क्यों बदल गया मोबाइल का टाइम? जानिए इसके पीछे का टेक्निकल सच

पहली नजर में यह हैरान करने वाली घटना लगती है। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञ इसे नेटवर्क और टाइम जोन सिंक्रोनाइजेशन से जोड़कर देखते हैं। दरअसल, अधिकांश स्मार्टफोन में "Automatic Date & Time" और "Automatic Time Zone" फीचर ऑन रहता है। फोन जिस मोबाइल नेटवर्क से जुड़ता है, उसी नेटवर्क से समय और टाइम जोन की जानकारी भी प्राप्त करता है। यदि सीमा के पास किसी विदेशी टेलीकॉम नेटवर्क का सिग्नल ज्यादा मजबूत मिल जाए, तो फोन उसी के आधार पर टाइम जोन अपडेट कर सकता है।

भारत-चीन सीमा के कुछ इलाकों में भारतीय मोबाइल नेटवर्क कमजोर पड़ जाता है। जबकि दूसरी तरफ से आने वाले सिग्नल फोन तक पहुंच सकते हैं। ऐसी स्थिति पहले भी अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में देखी गई थी। यहां लोगों के मोबाइल पर "Welcome to China" जैसे संदेशमैसेज और बीजिंग समय दिखाई देने की खबरें सामने आई थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई हैकिंग या साइबर हमला नहीं है। बल्कि फोन का नेटवर्क-आधारित ऑटोमैटिक टाइम अपडेट सिस्टम है। यदि यूजर ऑटोमैटिक टाइम ज़ोन बंद कर दे और टाइम मैन्युअली सेट कर दे, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

क्या है अन्य कारण?

शक्तिशाली चीनी मोबाइल टावर: चीनी सेना (PLA) ने सीमा के उस पार एलएसी (LAC) के बिल्कुल नजदीक बेहद शक्तिशाली 5G मोबाइल टावर स्थापित किए हैं।

नेटवर्क ओवरलैपिंग: इन चीनी टावरों के सिग्नल इतने मजबूत हैं कि वे भारतीय सीमा के भीतर तक आ जाते हैं। जब भारतीय नागरिकों के फोन का 'ऑटोमैटिक टाइम जोन' (Automatic Time Zone) ऑन होता है, तो उनका फोन भारत के कमजोर सिग्नल की बजाय चीन के मजबूत नेटवर्क सिग्नल को पकड़ लेता है। नेटवर्क बदलते ही फोन का समय अपने आप चीन के समय (GMT+8) के अनुसार बदल जाता है।

स्थानीय लोगों की क्या हैं चिंताएं?

इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे कि चुशुल, डेमचोक और न्योमा में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क (जैसे जियो, एयरटेल या बीएसएनएल) के सिग्नल काफी कमजोर हैं। इसके कारण चीनी नेटवर्क आसानी से हावी हो जाता है। यह न सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है। बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील है।

भारत-चीन सीमा के कई दुर्गम इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। जब स्थानीय नेटवर्क कमजोर होता है, तब फोन दूर स्थित लेकिन अधिक शक्तिशाली विदेशी नेटवर्क से जुड़ने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में डिवाइस समय, नेटवर्क पहचान और अन्य सूचनाएं उसी नेटवर्क से लेने लगता है।

2018 में अरुणाचल प्रदेश के किबिथू और काहो जैसे सीमावर्ती इलाकों में भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां भारतीय मोबाइल फोन चीनी नेटवर्क से जुड़ गए थे और फोन की घड़ी अपने-आप बीजिंग समय पर पहुंच गई थी।

टेलीकॉम विशेषज्ञों की राय

टेलीकॉम विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि सीमा क्षेत्रों में मजबूत और स्थिर भारतीय नेटवर्क की कितनी आवश्यकता है। पहाड़ी भूगोल, कम आबादी और कठिन मौसम के कारण कई क्षेत्रों में टावर स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होता है। जबकि दूसरी ओर चीन ने सीमा के पास दूरसंचार ढांचे का तेजी से विस्तार किया है।

हालांकि, लद्दाख वायरल वीडियो की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। लेकिन तकनीकी दृष्टि से ऐसा होना संभव माना जाता है। यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। लद्दाख में मोबाइल फोन पर चीन का समय दिखने का वायरल वीडियो केवल एक तकनीकी घटना नहीं। बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में दूरसंचार ढांचे की चुनौतियों को भी उजागर करता है।

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