Land-for-Job Case: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (9 जनवरी) को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों तथा अन्य लोगों से जुड़े नौकरी के बदले जमीन घोटाले में आरोप तय करने का आदेश दिया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव पर आरोप तय किए हैं। इस दौरान कोर्ट बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लालू परिवार की तरफ से अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया गया।
'लालू परिवार ने क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया'
कोर्ट ने कहा कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव एवं उनके परिवार के सदस्यों ने कथित रेलवे लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम में एक क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया। कोर्ट ने नियुक्तियों के पीछे एक बड़ी साजिश के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के मामले को स्वीकार कर लिया। स्पेशल जज विशाल गोगने ने आरोप तय करने का आदेश देते हुए कहा कि शक के आधार पर लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों की तरफ से एक बड़ी साजिश थी।
दिल्ली कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए सबूत इस स्टेज पर आरोपी के खिलाफ घोटाले में उनकी कथित भूमिका के लिए आगे बढ़ने के लिए काफी हैं। जज ने लालू प्रसाद यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भ्रष्टाचार के अपराध के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता के तहत अन्य अपराधों के लिए आरोप तय किए।
कोर्ट में पेश हुआ लालू परिवार
कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य सहित सभी आरोपियों को आज व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था। विशेष जज विशाल गोगने ने 19 दिसंबर को लालू यादव एवं अन्य के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से द्वारा दायर मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि आरोप तय करने पर आदेश 9 जनवरी को सुबह 10:30 बजे सुनाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया था कि उसकी चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है।
जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित इंडियन रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप-डी कैटेगरी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं।
इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने RJD प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफे में दिए या ट्रांसफर किए। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गई। इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के बराबर है। आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।